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| Caste system in India |
क्षुद्र कौन है? | Casteism | Caste system in India
प्रश्न : क्षुद्र कौन है???
जवाब :
- मनुस्मृति के अनुसार जन्म से सब “ क्षुद्र “ ही है।
- जो मनुष्य अपने भाग्य को बदलने के लिए मेहनत नहीं करता, शास्त्रों का अध्ययन नहीं करता, ज्ञान प्राप्ति नहीं करता, वह क्षुद्र है।
- जो अपने को आत्मा जानने के लिए, परमात्मा को जानने के लिए प्रयास नहीं करता, वह क्षुद्र है।
- जो अपने शरीर को साफ नहीं रखता, मन को शुद्ध नहीं रखता, वह क्षुद्र है।
- जो अपने घर को साफ नहीं रखता, कचरे मे पड़ा रहता हे, वह क्षुद्र है।
- जो किसी के दुख दर्द को नहीं समझता और किसी के दुख दूर नहीं करता, वह क्षुद्र है।
- जो आलसी है, नीचे विचार का है, अपने परिवार को तिरस्कृत करता है, अपनी जिम्मेदारी नहीं समझता, वह क्षुद्र है।
- जो मांस, मदिरा का पान करता है, वेश्या गामी है, अनीति से धन कमाता है, वह क्षुद्र है।
- जो अपनी गरीबी को दूर नहीं करता, भूखे को भोजन और प्यासे को पानी नहीं देता, वह क्षुद्र है।
- सबसे अधिक जो अपने को नीचा समझता है, लघुताग्रंथि से पीड़ित है, अपने बच्चों को भी हीन भावना से ग्रसित करता है, वह अत्याधिक निंदनीय क्षुद्र है।
- तो अशुद्धता से ऊपर उठो अपने को जानो और पहचानो “ ब्रह्म “ बनो।
प्रश्न : वैश्य कौन है???
जवाब :
- जो खाली अपने लिए कमाता है और क्षमता के बावजूत दूसरे की मदद नहीं करता, वह “ वैश्य “ है।
- जो अपने परिवार को ही खुश देखना चाहता है, वह वैश्य है।
- जो नात जात के चक्कर में पड़ा है, वह वैश्य है।
- जो स्वार्थ के लिए मानवता भूल जाता है, वह वैश्य है।
- जो अपने पैसों के घमंड में फिरता है, वह वैश्य है।
- जो संग्रहखोरी में धन, अनाज, जमीन सब अपने लिए इकट्ठा करने में पड़ा है, वह वैश्य हे।
- जो दूसरों को इज्जत, मान नहीं देता, वह वैश्य हे।
- जो स्वार्थ के अलावा कभी कोई काम नहीं करता, वह वैश्य है।
- सबसे अधिक जो अपने अलावा किसी को कुछ नहीं मानता, ऐसा अहंकारी, घमंडी, तुंड मिजाजी हे, वह घोर वैश्य है।
प्रश्न : क्षत्रिय कौन है???
जवाब :
- जो अपने गांव, देश, विश्व के हित में अपनी जान की भी परवाह नहीं करता, वह क्षत्रिय है।
- जो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने में अपने डर से ऊपर उठता है, वह क्षत्रिय है।
- जो सच्चाई और लोकहित में रात-दिन कार्य करता है, वह क्षत्रिय है।
- जो अपने हर डर को जीतता है, वह क्षत्रिय है।
- जो न्याय और नीति से कमाई करता है, वह क्षत्रिय है।
- जो छोटे को समझाकर, बड़े को आदर से और अपने समान को डांटकर सुधार शकता हे, वह क्षत्रिय है।
- जो अपने शारीरिक शक्ति और निडर जिगर से सबके दिल को जीत लेता है, वह क्षत्रिय है।
- जो बुराई को काटकर फेंकने में पीछे नहीं हटता, चाहे उसके सामने अपना परिवार ही क्यों ना हो, वह क्षत्रिय है।
- जिसके आने से स्त्रीया सम्मानित महसूस करें, बड़े गर्व करें और छोटे बेझिझक उसके पास प्यार से जा सके, वह क्षत्रिय है।
- जो चरित्रवान हो, गुणवान हो, जिगर वान हो, वह क्षत्रिय है।
- सबसे अधिक जो कभी भी मदद से पीछे ना हटे, बेईमानी देखकर जिसका खून खोल उठे, वह क्षत्रिय है।
प्रश्न : ब्राह्मण कौन है???
जवाब :
- जो हर एक जीव में ब्रह्म को देखें वह “ ब्राह्मण “ है।
- जिसे इस पृथ्वी पर कैसे जीना, खाना, पीना, कर्म करना और वह खुद उसका आचरण करता हो, वह ब्राह्मण है।
- जो दूसरे लोगों को चरित्रवान और वीरता का ज्ञान दे, वह ब्राह्मण है।
- जिसका मन पवित्र, आचरण शुद्ध हो, वह ब्राह्मण है।
- जो हमेशा समाज के हर एक को अपने से भी ऊंचा उठाना जानता हो और उसे ऊंचा उठाता हो, वह ब्राह्मण है।
- जो किसी की निंदा चुगली नहीं पर सच्चाई से जिये, वह ब्राह्मण है।
- सबसे अधिक जो हमेशा सबको “ ब्राह्मण “ बनाने की कोशिश करें, वह सबसे ऊंचा ब्राह्मण है।
मनुस्मृति के अनुसार.....
क्षुद्र, वैश्य, क्षत्रिय, ब्राह्मण के घर जन्म लेने से आप क्षुद्र, वैश्य, क्षत्रिय, ब्राह्मण नहीं बन जाते..
उसके योग्य कर्म ओर
गुण भी होने चाहिए ।
क्षुद्र :
जन्म से सब “ क्षुद्र “ ही है,
उसके गुण और आचरण से उसे ऊंचा उठना हे।
वैश्य :
जो खेती ओर वेपार मे कुशल हे वह वैश्य हे।
उसे वैश्य से ऊपर उठना हे।
क्षत्रिय :
जो समाज के रक्षा का कार्य करने के गुण रखता हो,
और समाज की रक्षा करता हो वह क्षत्रिय हे।
अन्य कभी भी नहीं।
उसे क्षत्रिय से ऊपर उठना हे।
ब्राह्मण :
जो लोगो को सही तरीके से नीति से जीना सिखाये,
मुक्त होने की शिक्षा देने हेतु गुरु से शिक्षा प्राप्त की
हे,
वह ब्राह्मण हे।
अन्य कभी भी नहीं।
उसे ब्राह्मण से ब्रह्म बनना हे।
पुरुषसुक्त के अनुसार.....
पुरुषसूक्त (ऋग्वेद
संहिता के दसवें
मण्डल का) एक प्रमुख सूक्त यानि
मंत्र संग्रह (10.90) है,
“ ब्राह्मणोSस्य मुखमासीद्
बाहू राजन्य: कृत: |
ऊरू तदस्य यद्वैश्य: पद्भ्या शूद्रोSअजायत ||११|| “
अर्थ :
विराट पुरुष का
मुख ब्राह्मण अर्थात् ज्ञानी (विवेकवान) जन हुए |
क्षत्रिय अर्थात
पराक्रमी व्यक्ति, उसके शरीर में
विद्यमान बाहुओं के समान हैं | वैश्य अर्थात् पोषणशक्ति-सम्पन्न व्यक्ति उसके जंघा,
एवं सेवाधर्मी
व्यक्ति उसके पैर हुए |
ध्यान
से पढ़िये, यहा पर यह नहीं कहा की, ब्राह्मण के घर जन्मे या वैश्य के घर जन्मे,
अपितु यह कहा की विवेकवान, पराक्रमी व्यक्ति, पोषणशक्ति-सम्पन्न व्यक्ति, सेवाधर्मी
व्यक्ति मतलब गुणो से हे, ना की जन्म से।
महाभारत के अनुसार भी यही बात सामने आती हे।
फिर भी अगर कोई मानने को तैयार नहीं हे, तो
उसकी मर्जी ओर तो क्या कहे???
हम ना कल माने थे, ना
आज मानेंगे,
हम ना कल समजे थे, ना
आज समजेंगे,
चाहे इतिहास कुछ भी कहे.. हम तो अपनी मन
की ही करेंगे,
दिखाओ लाख हमे आयना, हम उस
को फोड़ डालेंगे,
भूल हमारी ही क्यो ना हो, फिर
भी (सबसे) रिस्ता तोड़ डालेंगे।
प्रश्न : अगर आपका पड़ोसी (कोई भी जाती-वर्ण का हो) दुखी है, तो आप भी सुखी नहीं रह शकते!!!! कैसे????
जवाब :
मेरे भाई बहनों सीधी सी बात है, अगर आपके परिवार में कोई एक भाई आगे बढ़ जाता है और दूसरा पीछे रह जाता है और वह बड़ा भाई उसकी मदद ना करें, तो बाकी भाई और लोग क्या कहेंगे???
भाई सोचेगा, “ मेरा भाई मेरी थोड़ी मदद कर देता, तो मैं भी थोड़ा आर्थिक मजबूत बन जाता। “
लोग कहेंगे, “ देखा खुद तो आगे बढ़ गया, अपने भाईओ को छोड़ दिया, आज भाइयों में वह प्यार कहां ? कलयुग है भाई!!!
(भाई हम लोग मोटी चमड़ी के हे, दुनिया की फिकर नहीं करते...)
हां अगर बाकी भाई निकम्मे है तो बात अलग है...
अगर आपके पड़ोस में कोई भूखा, प्यासा, बीमार है और आप उसकी मदद करने में सक्षम है, फिर भी आप उसकी मदद नहीं करते, तो कभी ना कभी उस गरीब परिवार को यह लगेगा कि, देखो इसको कितना अच्छा है गाड़ियों में घूमते हैं, अच्छे कपड़े पहनते हैं, खाना खाते हैं, इतने पैसे उड़ाते हैं, थोड़ी हमारी भी मदद कर देते... तो आप उसको थोड़ा काम देकर भी उसकी मदद कर दे, हां अगर वह निकम्मे है तो बात अलग हे...
आज यही होता है, हमारे पड़ोसी, हमारे आसपास के मोहल्ले, पड़ोसी गांव, पड़ोसी राज्य जब दुखी होते हैं, उनके पास खाने को पैसा नहीं होता, करने को काम नहीं होता है, फिर मजबूरी में तंग आकर वह आपके ही घर , मोहल्ले, गांव में चोरी करते हैं, डकैती डालते हैं, यहां तक की खुन भी करते हैं...
यही होता है जब आप उनके बारे में नहीं सोचते, तो वह आपके बारे में अच्छा क्यों सोचे?? जब आपको उनकी कुछ भी नहीं परवाह, तो उनको भी क्यों पड़ी है?? फिर लोग बोलते हैं आज कोई किसी का नहीं...
हमारा पड़ोसी देश की भी यही हालत हे, उनके यहां अच्छी शिक्षा नहीं, खाने को खाना नहीं, करने को काम नहीं, फिर वह मजबूर होकर ऐसे काम करेंगे जिससे हमारी देश की जनता को भी भुगतना पड़ता है। हां मैं आतंकवाद को कभी भी सही नहीं मानता, लेकिन देख लो उनके आतंकवादी इंटरव्यू में यही बात बताते हैं, क्योंकि उनके पास कुछ भी काम नहीं है इसलिए वह बहकावे में आ जाते हैं।
इसलिए तो सनातन संस्कृति कहती है, “ वसुधेव कुटुंबकम “ कि पूरा विश्व एक परिवार है। अगर परिवार में हम एक दूसरे को नीचा दिखाने का काम करेंगे, एक दूसरे की चीजें हड़पने में लगेगे, एक दूसरे की टांग खींचेगे तो यही होगा, पूरा विश्व इसलिए दुखी है, जैसे नर्क में जल रहा हे।
आशा हे आपको यह लेख पसंद आया होगा, तो कृपा करके इसे शेर जरूर करे और दूसरों को भी जगाने मे सहायक बने। धन्यवाद।
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