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| Doodh peene ke fayde nuksan |
Doodh peene ke fayde nuksan | दूध में डाले जाने वाले जहर-मिलावट
सबसे पहले कई लोग दुध को मांसाहार कहते हैं...
मुझे
समझ नहीं आता, की
अगर दूध मांसाहार है, तो
दुनिया में कोई शाकाहारी है ही नहीं!!! क्यों? क्योंकि
जो भी जन्म लेता है, वह
पैदा होते ही अपनी मां का दूध पीता है।
अब
हम भारतवासी सुबह उठकर ही उस दुध
में चाय, चीनी, तुलसी डालकर उबालकर, दूध के सारे पोषक तत्वों को नष्ट
कर, साथ
में चाय के सारे जहर
अपने शरीर में डाल देते हैं। तब तक हम को शांति नहीं मिलती। दूध के साथ तुलसी जेसी कई चिजे
लेनी मना हे।
यहां
बात दूध
की है। दूध लगभग हम गाय, भैंस, बकरी, ऊंट आदि कई शाकाहारी प्राणीओ का पीते हैं। उसमें पहचान कैसे
करें? कि
कौन सा अच्छा है।
देखो देशी गाय (जर्सी नहीं) का दुध थोडा पतला और पीलापन वाला होता है।
भैंस का दूध घट्ट और चर्बी वाला सफेद होता है। बाकी
जानवरों में से बकरी का दूध थोड़ा तीव्र स्वाद वाला गाढ़ा होता है।
अगर
आप स्वस्थता एवं बुद्धि बढ़ाना चाहते
हो, तो
देसी गाय का दूध पियो। अगर आप वजन बढ़ाना चाहते हो तो भैंस का दूध पियो। अगर आप
कुछ बीमारियां दूर करना चाहते हो तो बकरी या उट का दूध
पियो।
प्रश्न : देसी गाय और जर्सी गाय में क्या फर्क है?
जवाब
: वही
जो भैंस और हाथी में है।
देखो
लगभग गांव के लोग तो जानते ही हैं, कि
देसी गाय को खुन्ध होती है। वह जर्सी जीतनी लंबी नहीं होती, देसी गाय के सींग भी बड़े होते
हैं और सुंदर होते हैं। यह इसकी सामान्य पहचान है। जर्सी गाय लंबी होती है, उसके सिंग भी छोटे से ना के बराबर होते हैं और वह ज्यादा दूध देती
है।
देखिए देसी गाय कुदरती गाय और जर्सी गाय मिलावटी कृत्रिम गाय हे। जर्सी गाय डुक्कर आदि प्राणियों से बनी मिलावटी गाय है।
मतलब जो पहले से ही मिलावटी हे उसकी दूध भी मिलावटी ही हुवा। जर्सी गाय के दूध में पीलापन नहीं
होता उस गाय का दूध पीते हो तो, पश्चिमी संशोधन के अनुसार आप जहर पीते हो। उससे आपको कैंसर जैसी भयंकर
बीमारियां हो सकती है। जर्सी गाय का दूध सबसे ज्यादा डेनमार्क में होता है लेकिन
वह लोग भी इसका दूध दरिया में बहा देते हैं पीते नहीं है।
प्रश्न : जर्सी गाय फिर क्यों बनी???
जवाब : जर्सी
गाय तो खाली दूध ज्यादा उत्पन्न करने के लिए ही बनाई गई है।
आज भी भारत देश में कई लोग कमाने के लिए जर्सी गाय पालते हैं और खुद देसी गाय का
दूध पीते हैं। हम सोचे समझे बिना यह दूध पीते है।
प्रश्न : अमूल, माही आदि डेरीयो का दूध कैसा हैं?
जवाब : आप
अमूल माही आदि बड़ी डेरीयो का दूध पी के समझते हो वाह हमने तो बहुत ही बढ़िया दूध
पिया... मगर भाइयों यह दूध भी आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है!!!
क्योंकि यह डेरी वाले उस दूध को 80 से 84 डिग्री
सेंटीग्रेड तक गर्म करते हैं। फिर वापस उसको 4 डिग्री
सेंटीग्रेड तक ठंडा करते हैं। तो 100 डिग्री पर तो पानी भाप बनकर उड़
जाता है, तो दूध में रहे हुए प्रोटीन, विटामिन, कैल्शियम, आयोडीन, फास्फोरस, B12 आदि चीजें होती है, वह उबालने से खत्म हो जाती है।
फिर उस दूध को पीने से क्या फायदा? उसमें
खाली चर्बी बच जाती
है।
दूसरा
यह डेरी वाले सभी जानवरों का दूध एक साथ मिला देते हैं। यह दुध सभी जानवरों का होता है, अकेली गाय या भैंस का नहीं होता।
तो अगर आप खाली गाय का दूध पीना चाहते हो, तो
डेरी का दूध सही नहीं है। उसके अलावा उन
डेरियो मे
जो लोग
दूध जमा करवाते हैं। वह ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में उसमें चीनी, नमक, सोडा, तेल, यूरिया, आदि कई चीज मिला देते हे। जिससे यह हानिकारक हो जाता है।
प्रश्न : डेरी वाले दूध को उबालते क्यों है?
जवाब: क्योंकि
डेरी वाले को उस दूध को 3 से
4 दिन तक
बेचने के लिए संभालना पड़ता है।
तो यह दूध बिगड़ ना जाए, मतलब
खट्टा ना हो जाए, इसके
लिए उसको गर्म करते हैं फिर ठंडा करते हैं।
थोड़ी गहराई में समझे...
थोड़ी गहराई में समझे तो दूध में जो सूक्ष्मजीव होते
हैं, वह
अपनी संख्या बढ़ाने की क्रिया से और चयपचन से.. मतलब कि यह सूक्ष्मजीव उस दूध में
जो अपना हगना-मुतना करते हैं उससे दूध
में एसिडिटी (खट्टापन) उत्पन्न
हो जाता है।
सूक्ष्मजीव की संख्या बढ़ने से यह ज्यादा बढ़ जाती है और दूध खट्टा यानी बिगड़ जाता
है। इनकी संख्या ना बढे इसके
लिए पहले डेरीवाले दूध में हाजिर सूक्ष्मजीव को 84 डिग्री सेंटीग्रेड गर्म करके मार
डालते हैं। फिर इसको 4 डिग्री
ठंडा कर देते हे। क्योंकि
यह सूक्ष्मजीव एक निश्चित तापमान पर ही अपना कार्य (मतलब चयपचन और संख्या बढ़ाना) कर सकते हैं। इसलिए 4 डिग्री पर यह सूक्ष्मजीव बढ़ते नहीं हैं और दूध अच्छा रहता
है। सोच लो यह दूध आपको क्या पोषण देगा?
प्रश्न : दूध को कैसे ले या पिये?
जवाब:
दूध पीने का सबसे अच्छा समय है, दूध दोहने के बाद तुरंत पी लिया जाए।
अगर यह मुमकिन नहीं है तो उसे 1 से 3 घंटे के अंदर पी लेना
चाहिए। उसके बाद उसमें सूक्ष्मजीव बढ़ने लगते हैं और उबालने से उसके पोषक तत्व
नष्ट हो जाते हैं।
प्रश्न: कौन सा दूध सही है कैसे पता करें?
जवाब:
सबसे
अच्छा तरीका है आप खुद ही गाय को पाले, लेकिन
आज के समय में यह थोड़ा बहुत कठिन है। तो आप कम से कम जिससे भी दूध लेते हो उससे
पूछो भाई दुध में मिलावट तो नहीं करते? दूध जर्सी गाय का तो नहीं है?
खुद उसके वाडे पर जाकर निश्चित करें कि वह सही तरीके
से उस दूध को निकालता है। यह
सबसे अच्छा तरीका है। क्योंकि आप उसके ग्राहक हो तो वह आपको मना नहीं कर सकता। मना करे तो उससे दुध ना लो।
प्रश्न: दूध में डाले जाने वाले जहर (मिलावट) कौन से हैं?
जवाब:
पहला: Oxytocin
Oxytocin 1.5 से
2.5 ml इंजेक्शन पशु को ज्यादा दूध देने के लिए दिया
जाता है। उससे वह शांत भी रहता है। सामान्यतः यह इंजेक्शन गर्भवती स्त्री को दिया
जाता है। ताकि बच्चा गर्भ में से बाहर आ सके, रक्त
स्त्राव को नियंत्रित करने और गर्भपात की समस्या दूर करने के लिए दिया जाता हे। ऑक्सीटॉसिन से शरीर में इरिटेशन, भूख कम लगना, उल्टी, पेट दर्द, नाक बहना, सिर दर्द, याद शक्ति कम होना, हदय की धड़कन बढ़ना, स्त्रियों में ज्यादा रक्तस्त्राव, भ्रमणा, जीभ एठना, थकावट, कमजोरी, स्नायु के झटके, भयंकर रक्त दबाव का बढ़ जाना, जिससे व्यक्ति की मौत भी हो सकती
है।
अगर आपका दूध वाला ऐसे इंजेक्शन दे के दूध बेचता है, तो वह आपको धीमा जहर दे रहा है, ऐसा दूध खाने से बेहतर है दूध ना
खाएं।
दूसरा : चीनी (Sugar)
दूध
में कार्बोहाइड्रेट बढ़ाने के लिए चीनी मिलाई जाती है। जिससे दूध गाढ़ा भी होता
है। तो यह चीनी तो रासायनिक प्रक्रिया से बनाई जाती है, तो वह सब रसायण दूध में भी आ जाते हैं।
तीसरा : स्टार्च (Starch)
दूध
में स्टार्च मिलाने से दूध की मात्रा बढ़ जाती है। हमें जितना जरूरी स्टार्च है, वह
दूसरी चीजों से मिल जाता है। अतिरिक्त स्टार्च हमारे शरीर में पचता नहीं है, यह चर्बी में रूपांतरित हो जाता
है।
चौथा : साबुन (Soap)
अब कोई साबुन क्यों मिलाएगा दूध में?
भाई
झाग बढ़ाने के लिए और दूध को गाढ़ा करने के लिए। इस रसायनों से आपके गुर्दे और पेट
को बहुत सी बीमारियां लगती है।
पाचवा : सैलिसिलिक एसिड, बेंजोइक एसिड, फॉरमालीन (Salicylic acid, Benzoic acid, Formalin)
अरे बाप रे.. ऐसी चीजे!!!
जी हां..
यह
एसिड, सैलिसिलिक
एसिड और बेंजोइक एसिड है। जो कई सारे खाद्य सामग्री में परिरक्षक मतलब
प्रिजर्वेटिव (Preservatives) के
रूप में डाली जाती है। अब यह अतिरिक्त एसिड आपकी पेट में जलन, एसिडिटी, गैस और किडनी के कई रोग उत्पन्न
करती है। यह रक्त में मिलकर रक्त
की एसिडिटी बढ़ाकर पूरी शरीर को कई रोग तोहफे में देती है।
छठ्ठा : कई प्रकार के तेल (Oils)
दूध में सोयाबीन जैसे कई तेल भी मिलाए जाते हैं। यह
तेल दूध की चर्बी मतलब की फैट और गाढ़ा मतलब SNF बढ़ाने के लिए मिलाते हैं। जिससे के डेयरी में उनके दूध
के अच्छे भाव मिले। यह तेल भी आपके हदय और नस नाड़ियों को बंद करके उसमे कोलेस्ट्रोल जमाते हैं। अनचाही कई बीमारियां मुफ्त
में देते हैं।
सातवा : यूरिया-एमोनिया जैसी खादे (Urea-Ammonia
Fertilizer)
यह भी दूध को गाढा बनाने को डाला जाता है। इनका खाद के रूप में उपयोग किया जाता है। इसलिए किसान के पास तो यह
होता ही है। यह हमारे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है, रक्त को खराब करता है, पेट की बीमारियां पैदा करता है।
सोचो यह सब खाद की आपके शरीर को जरूरत है???
इसके अलावा नमक (Salt), बोरिक एसिड (Boric acid) , कॉस्टिक सोडा (Castaic soda) , हाइड्रोजन
पेरोक्साइड (Hydrogen Peroxide)
जैसे जहरीले तत्व भी मिलाए जाते है, चुना
तो सबसे खतरनाक है।
मुख्य रूप से यह सब मिलावटी दूध की चर्बी और घट्टता बढ़ाने को मिलाए जाते हैं।
जिससे डेयरी में दूध का भाव ज्यादा मिले। सोचो लोगों की आत्मा जमीर कितने मर गई होगी.. कि दूसरे भले ही मरे
मुझे पैसा मिलने चाहिए।
प्रश्न : घर पर कैसे पता करें कि दूध शुद्ध है या नहीं?
जवाब:
मैंने पहले ही बताया कि आप ऐसे व्यक्ति से ही दूध लो
जिन्हें आप अच्छी तरह से जानते हो। या तो खुद पशुपालन करो। नहीं तो दूध
पियो ही नहीं... यह ज्यादा बेहतर रहेगा।
पहला : दूध
की बूंदे थाली पर गिरा के देखो, अगर
सफेद कलर की लकीर दिखाई देती है, तो
दूध में पानी नहीं मिलाया गया। लेकिन कई बार सफेद कलर की लकीर कुछ और चीज मिलाने
से भी दिखाई पड़ सकती है।
दूसरा : थोड़े
से दूध में हल्दी मिलाएं अगर पाच
मिनिट बाद वह
लाल हो जाए, तो
समझना उसमें कोई डिटर्जेंट मिलाया गया है। अगर वह पीली रहे तो डिटर्जेंट नहीं मिला हे।
तीसरा : समान
मात्रा में दूध में पानी मिलाकर उसे ज़ोर
से हिलाओ, अगर
उसमें जाग दिखाई दे तो साबुन मिलाया होगा।
चौथा : अगर
दूध को गर्म करने के बाद उसका स्वाद कड़वा लगे या दूध थोड़ा पीला हो जाए तो समझना
वह कृत्रिम दूध है।
पांचवा : दूध
अगर स्वाद
मे खारा
लगे तो समझना उसमें नमक मिलाया है।
छठ्ठा : दूध बहुत ही मीठा लगे तो समझ लेना
उसमें चीनी मिलाई है और उबालने के बाद उसकी मिठास बढ़ जाएगी ।
सातवा
: दूध
हाथों की हथेलियों में लेकर हथेलियों को
आपस मे खूब
मलो। थोड़ी देर तक 5 से 10 मिनट अगर दूध चमड़ी द्वारा शोख
लिया जाए, तो
समझना उसमें कुछ मिलावट नहीं है। लेकिन अगर हाथ चिकना रहे तो समझना तेल की मिलावट
की गई है।
आठवां : अगर
दूध में स्टार्च मिलाया होगा तो वह थोड़ी देर रखे
रहने से अपने आप नीचे बैठ जाता है। और ऊपर दूध की पतली परत रह जाती है।
नोवा : करीब 3ml दूध लेकर उसमें टॉयलेट साफ करने
वाला Acid की 10 बुँदे डालें, उसमें एक चम्मच चीनी मिलाएं, अगर 5 मिनट के बाद वह लाल हो जाए तो
उसमें वनस्पति घी की मिलावट है।
बाकी कई टेस्ट लैबोरेट्री में होती है, उसकी लैब टेस्ट किट भी बाजार में
मिलती है, लेकिन
उससे अच्छा परिणाम नहीं मिलता।
प्रश्न : दूध मे आज कल हम कोनसी चिजे मिलाते हे? और उसके फायदे क्या हे?
अब आते
हैं दूध में डालने वाले पदार्थ, जो
हम खुद तो खाते नहीं अपने बच्चों को ज्यादा खिलाते हैं।
बाजार में विज्ञापन के माध्यम से, दुध की शक्ति बढ़ाने के लिए, कई वस्तुएं दूध से भी महंगी कीमत
पर बेची जाती है। आप उसको खरीद कर अपने बच्चे की सेहत की बैंड बजाते हो.. बच्चा तो
समझता नहीं आप तो समझदार हो ना???
मुझे
हंसी आती है, जब
विज्ञापन में कहते हैं दूध की शक्ति बढ़ाएं!!!
अरे मूर्ख हो? हम
बचपन से पढ़ते आए हैं और हमारे माता-पिता ने बताया है कि दूध संपूर्ण आहार है।
फिर भाई आप इसकी शक्ति कैसे बढ़ा सकते हो? और
वह भी उसमें चॉकलेट जैसी मीठी चीजें डालकर! वाह भाई!!!
कई तो कहते हैं, इसमें
फलाना है, ढिमका
हे.. हम
भी यह सुनकर खरीद लेते हैं और सब को बता ते
फिरते हे.. इसमें
फलाना है। कोई पूछे भाई यह फलाना क्या है? तो
हमको पता नहीं होता!! देखा देखी चल रहा है, आज
लोग पैसे कमाने की दौड़ में इतने गिर गए हैं, कि
बच्चों को भी नहीं छोड़ते और उनको ही टारगेट बनाया जाता है। हम तो बस कुछ भी खरीद
लेते हैं बिना सोचे समझे!!!
उदाहरण : Boost
कुछ लोग बच्चों को दूध में चम्मच भर भर के Boost डाल
कर देते हैं। अरे भाई जरा सोचो उस में कितना प्रोटीन है? कितना कार्बोहाइड्रेट है? उसमें कितने प्रीजरर्वेटिव्स है? वह
आपके बच्चों को हानि कर सकता है। जैसे कम पोसकता
हानिकारक है, वैसे
अधिकता भी नुकसान करता है। यह अधिक पोषक तत्व आपको और आपके बच्चों को परेशान कर
सकते हैं। यहा
तक बहुत बीमार भी करते
हैं।
Boost के दुष्प्रभाव :
कई प्रकार के एलर्जी के दुष्प्रभाव : जैसे लाल चमाके, खुजली, थकान हो सकती है।
बूस्ट ने खुद कहा है कि, अगर आपको इसको लेने से कब्ज, पेट दर्द, उल्टी जैसी परेशानी हो तो इसे ना
ल..
यह गुर्दे
(किडनी) के लिए हानिकारक हो
शकता हे।
अगर ज्यादा प्रोटीन लिया तो आपकी गुर्दो को यह अतिरिक्त प्रोटीन हटाने के
लिए, ज्यादा
कार्य करना पड़ेगा और यह बार-बार होने से आपकी किडनी गंभीर रूप से खराब हो शकती है।
वजन में कमी :
यह वजन कम करने की दवा नहीं है। लेकिन इसमें ऐसे
द्रव्य डाले हैं, जिससे
आपकी भूख कम हो जाती है। तो आपका वजन पर भी असर होता है।
Boost एक
प्रकार का अतिरिक्त आहार (सप्लीमेंट) मतलब पूरक आहार है। इसे लेने से पहले सावधानी
और योग्य मार्गदर्शन ले। यह एक प्रकार का एनर्जी ड्रिंक है। मतलब शक्ति दायक पेय है। जिस में डाले गए कई तत्व
कृत्रिम रूप से बने हैं, जो
आपकी हदय की
धड़कन बढ़ाना और पेट की कई बीमारियां भी करते हैं।
Boost मैं क्या होता है?
कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) , पानी (Water), चीनी
(Sugar), ग्लूकोस
सिरप (Glucose Syrup), साइट्रिक एसिड (Citric acid), सोडियम
साइट्रेट (Sodium citrate), इनोसीटोल (Inositol), अमोनिया
कैरेमल (Ammonia Caramel ) , टौरिन (Taurine) और
सबसे खतरनाक केफैन (Caffeine)
होता है। सोच लो देख लो भाई इस को पीना चाहो
तो आपकी
मर्जी..
यह तो एक उदाहरण मात्र है। ऐसे ही ओर भी सिरप हे। Hershy Syrup, PediaSure, Horlicks,
Cadila ActiLife, Bournvita, Protinex और
भी बहुत सारी चीजें है..
पर क्या आपको पता है कि इसमें क्या डालते हैं? और यह खाना अच्छा है? या इससे हमारा शरीर स्वस्थ रहेगा?
यह सब दूध के साथ पूरक आहार के रूप में, तुरंत शक्तिदायक पेय या शरीर के वृद्धि के लिए देने के
लिए बताया जाता है।
लेकिन इसमें कैल्शियम, विटामिन
और प्रोटीन के नाम से.. आर्टिफिशियल रासायनिक चीजें मिलाकर बेचते हैं। जो बच्चों
के लिए सही नहीं है, इसमें
पाए जाने वाले रसायन कृत्रिम होते हैं। जिसे हमारा शरीर पचा नहीं पाता और नुकसान पहुंचाता है।
आप अपने बच्चे को प्राकृतिक चीजें पीलाएं। जैसे कि ताजे फलों का रस, सब्जियों का रस, नारियल पानी, नींबू पानी, आंवला रस, एलोवेरा रस, अंगूर जूस, यह सब हमारे रक्त में रही
ऐसीडिकता को
खत्म करते हैं, जिससे
शरीर स्वस्थ बलवान बनता है। बच्चों
को चाय तो कभी भी न
दे।
और हां अगर दूध में डालना ही है तो.. मिश्री डालें, चुटकी हल्दी, सोंठ पाउडर, पिपरीमुल पाउडर डाल कर दे दो.. शरीर मजबूत
बनेगा और रोगप्रतिकारक
शक्ति बढ़ेगी बिलकुल १०० % सही बात हे। मे गेरंटी देता हु।
दूध के साथ नमक, चुना, खट्टे फल, नाश्ता, खाना, नहीं देना चाहिए उससे कई नुकसान हो सकते
हैं।
दूध
पीने का सही समय रात को सोते वक्त का है। क्योकि उसी समय दूध को पचाने वाले एंजाइम
पाए जाते हैं। पूरी
रात दुध अच्छी तरह पच शकता हे। आप
बच्चों को सुबह 7:00 से 9:00 के बीच थोड़ा दूध दे सकते हैं लेकिन
अकेला.. अगर
उनको अच्छा लगे तो जबरजसती न दे, क्योकि
शरीर अपने आप दुध को सूंघकर मना कर देता हे की इसकी जरूरत नहीं हे। यह प्राकृतिक
होता हे।
***
पहेले हमारे देश मे दुध-छास लोग
मुफ़त मे देते थे।
फिर दूधवाला गली-गली जाकर दुध
बेचने लगा।
अब दुकान पर लोग थेलिवाला दुध
लेने जाते हे।
मतलब देश विकाश कर रहा हे? या पतन?
दुध पीना ही हे तो शुद्ध पियो
वरना मत पियो..
क्योकि खराब दुध पीके, बीमार
होके, परिवार
को परेशान करके धीरे धीरे मरने से अच्छा हे.. दुध ना पीनेसे कम से कम उस जानवर को
तो हमारी बजह से परेशान कम होना पड़ेगा।‘
जागो ओर जगाओ न उल्लू बनो न बनाओ ‘
आशा हे आपको यह लेख पसंद आया होगा, तो कृपा करके इसे शेर जरूर करे और दूसरों को भी जगाने मे सहायक बने। धन्यवाद।
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