लोकतंत्र देश की जनता कभी भी सुखी नहीं रह शकती?, भारत मे लोकतंत्र की स्थिति, लोकतंत्र के फायदे ओर नुकसान, लोकतंत्र का भविष्य...
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| भारत मे लोकतंत्र |
लोकतंत्र देश की जनता कभी भी सुखी नहीं रह शकती??? | भारत मे लोकतंत्र | लोकतंत्र के फायदे ओर नुकसान
प्रश्न : राजनीति का सही अर्थ क्या हे??
राज मतलब देश के ऊपर काबू रखना
राज मतलब राज्य, आज देश
राज मतलब राजा, राजा मतलब सेवक
नीति मतलब न्याय
नीति मतलब इमानदारी
नीति मतलब नियम
राजनीति मतलब सही नियम कानून से देश की जनता के दिलो पर राज्य
करना,
मतलब लोगो से प्यार करना, जनता को अपने बच्चे मानना, उनकी सेवा करना।
प्रश्न : लोकतंत्र देश की जनता कभी भी सुखी नहीं रह शकती??? क्यों???
जवाब :
लोकतंत्र मतलब लोगों का तंत्र मतलब सबका तंत्र.....
जैसे कि बस ट्रेन सब की है मतलब जिसको जो चाहे वह कर सकता है, गंदा या अच्छा, जाहेर स्थल जैसे मंदिर, चौपाटी, नदिया, सागर सबके है, मतलब कोई भी उसको अच्छा या गंदा कर सकता है।
हमारे देश में जो सबका है वह किसी का भी नहीं है.....
मतलब यह देश सबका है मतलब किसी का भी नहीं!!!
इसलिए इस देश की जनता कभी भी एक नहीं होती।
क्योंकि जिसको जो करना है वह वो करेगा,
जिसको देश में लूट मचानी है, वह लूट मचाएगा,
जिसको सेवा करनी है, वह सेवा करेगा,
जिसको साधु बनना है, वह साधु बनेगा,
जिसको शैतान बनना है, वह शैतान बनेगा।
जहां चाहे वहां थूको, मुतों, कचरा फेको अपना ही देश है यार!!! अपने घर को तो साफ रखेंगे, लेकिन दूसरे के घर के सामने कचरा करेंगे, यही आज की संस्कृति हे।
माना पूरा देश ऐसा नहीं करता, पर लगभग सभी यही करते है। क्योंकि उनको अपना घर साफ रखना है, देश नहीं, अपने घर से कचरा साफ करना है, देश में से नहीं, अपने बच्चों और पति पत्नी को समझाना है, देश के नेताओं को नहीं ... अपने बच्चों को शिक्षित बनाना है, अपने पर राज करने वाले नेताओं को नहीं। खुद कमाकर के गाड़ी बंगला लेना है, देश को आगे नहीं बढ़ाना!!!
आप बोलोगे, “ भाई हम खुद धनवान बनेंगे, व्यापार करेंगे तभी तो देश आगे बढ़ेगा। “ हां भाई मगर तुम अकेले नहीं, सब ऐसे ही अच्छी तरह से व्यापार करेंगे, सब आगे बढ़ेंगे, तब देश आगे बढ़ेगा, एक दो से नहीं होगा।
क्या किसी परिवार में एक भाई अमीर बन जाए, दूसरा गरीब रहे वह दूसरे भाईओ को कुछ भी मदद ना करें, उस परिवार को आप अमीर कहोगे?? नहीं। क्योंकि एक ही भाई अमीर है।
वैसे ही एक राज्य में अगर एक गाउ, एक तालुका ,
एक जिला, अमीर हे, तो क्या आप उस पूरे राज्य को अमीर कहोगे?? नहीं?
क्या पूरे देश में एक ही राज्य व्यापार, धंधे, खेती में आगे बढ़ेगा, तो क्या उस देश को आप अमीर कहोगे?? नहीं?
हो सके तो कंपनियां मत खोलो, छोटे-छोटे गृहउधयोग खोलो, आपके राज्य में चलाओ, खेती, पशुपालन बढ़ाओ। अकेले आपके अमीर होने से ही आप सुखी नहीं रह सकते। खुद का मत सोचो सबका सोचो। वरना कोई भी आपके बारे मे भी नहीं सोचेगा।
प्रश्न : भारत देश का कोई भी मुख्यमंत्री इस देश या देश की प्रजा को कभी भी आगे नहीं बढ़ा सकता??? क्यो ? कैसे ??
जवाब :
मेरे प्यारे देशवासियों यह हमारे देश का कड़वा सच है कि, हमारे देश में कुर्सी के लिए कुछ भी हो सकता है। यहां पर लोगों को खरीदा जाता है, बेचा जाता है, जातिवाद फेलाया जाता है, हिंदू मुस्लिम के दंगे करवाए जाते हैं, लांच रिश्वत से यहां लगभग सभी अधिकारी बिके हुए हैं।
यहां तक कि जवानों को भी लपेटा जाता है, साधु-संतों को फसाया जाता है, भाई सब कुछ होता है, गलत शलत प्रचार किया जाता है, लोगों को दारू पैसे दिए जाते हैं, मरवाया जाता है, मंदिर मस्जिद तुड़वाया जाता है और मतदान बूथ में भी गड़बड़ी होती है।
कुर्शी के लिए, चुनाव जीतने के लिए टेलीविजन में एडवर्टाइज देनी पड़ती है, बड़े-बड़े होडिंग्स लगाने पड़ते हैं, प्रचार के लिए कई पेंप्लेट छपवाने पडते हैं, यह सब
काम करने के लिए लोगों की जरूरत पड़ती है, उन लोगों को काम
करने के लिए पैसे देने पड़ते हैं।
कई सभाये भरनी पड़ती है, उनमें मंडप लगवाने पड़ते हैं, कुर्सियां लगानी पड़ती है, पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है, नाश्ते की व्यवस्था करनी पड़ती है, आने जाने के लिए वाहन व्यवहार में खर्चा करना पड़ता
है, कई प्रचार प्रसार के लिए यात्राएं करनी पड़ती है, उन यात्राओं में वाहन, ड्राइवर, काम करने वाले लोगो को पैसे देने पड़ते है।
सोचो जहां कुर्सी के लिए इतनी मेहनत की गई हो, वहां कुर्सी मिलने के बाद सेवा करने लग जाए, तो क्या कुर्सी वापस मिलेगी??? नहीं???
जरा सोचो.. भारत में जो भी चुनाव जीतते हैं, वह यह सब काम करवाने में करोड़ों अबजो खर्वों रुपयों का खर्च करते हैं, यह खर्चा करने के लिए रुपया कहां से आता है???
प्रश्न : कौन देता हे राजनेताओ को इतना सारा पैसा???
अब आप तो सब जानते ही हो.. कि यह पैसे बड़ी-बड़ी मल्टी नेशनल कंपनियों से आता है, बड़े-बड़े व्यापारी संगठनों और लोगों से आता है, यहां गफला किए हुए बड़े-बड़े राजनेताओं के छुपाए कालेधन से आता है, बड़ी-बड़ी अनेक फैक्ट्रीओ से आता है, बड़े-बड़े फिल्मी निर्माताओं से आता है, समाचार के बड़े बड़े चैनलों से आता है, और हमारे देश में व्यापार करने वाले दूसरे देशों से आता है, यहां तक कि कई बड़े-बड़े साधु समाज से भी आता है...
प्रश्न : यह बड़े-बड़े लोग क्यों देते हैं राजनेताओं को इतने सारे पैसे???
देखीये यह एक व्यापार है, जब कोई नेता सत्ता में आता है, तो उसके पास कई काम करवाने के लिए सता होती है। आप जानते
ही हो..
अगर विदेशी कंपनियों को
हमारे देश में व्यापार करना है, या कारखाने डालने हे, तो उनको इन
सत्ताधीशों से परमिशन लेनी पड़ेगी। इस परमिशन के बदले में यह नेता
उन लोगों से चुनाव में जीतने के लिए बड़ी बड़ी रकम लेते हैं।
हमारे देश में भी कई बड़ी बड़ी कंपनीया, जो अपना सामान हमारे देश
में बनाकर बेचती है, कई कंपनियां ज्यादा पैसे कमाने के चक्कर में गलत शलत सामान
देशवासियों को देती है, तो उनका यह धंधा व्यापार
बंद ना हो इसके लिए यह लोग भी इन बड़े-बड़े नेताओं को बड़ी बड़ी रकम
चुनाव में देते हैं।
कई ऐसे नेता है, कई ऐसे व्यापारी
है, जिन्होंने अपने दो नंबर का काला धन छुपा के रखा है, यह काला धन
सरकार छीन ना ले, इसके लिए ऐसे नेता और
व्यापारी भी चुनाव जीतने के लिए नेताओं को बड़ी रकम देते हैं।
कई मल्टीनेशनल कंपनियां हमारे देश में से ही वस्तुएं खरीद
कर, सस्ते दामों पर हमारे ही देशवासियों को बेचती हे, जिसको सरकार बंध
ना कर दे, इसलिए यह
कंपनियां भी नेताओं को चुनाव में बड़ी रकम देती है।
वैसे ही बड़े-बड़े फिल्म उद्योग अपना धंधा चलता रहे उसके
लिए इन नेताओं को पैसे देते हैं। बड़े-बड़े समाचार चैनल भी अपना चैनल चलता रहे, उसके लिए इन राजनेताओं को पैसे देते हैं।
हमारे देश में जिसकी सत्ता होती है, वह अपनी सत्ता की जोर से लोगों को डरा के धमका के चुनाव के
लिए पैसे ले लेती हे।
इसी तरह कई दवाइयों की कंपनियां, कई खाद की कंपनियां, कई शैंपू साबुन
की कंपनी, कई कपड़ों की कंपनियां, कई जूतों की कंपनी, कई मोबाइल की
कंपनी, डर के मारे या तो खुशामद के लिए इन राजनेताओं को पैसे दे
देती हे।
कई बड़े-बड़े जमीन माफिया, कई बड़े-बड़े
कांट्रेक्टर और लोकल व्यापारी भी इन राजनेताओं को पैसे देते हैं। कई सरकारी बड़े
बड़े अधिकारी, दारू –जुवा चलाने वाले, हप्ता वसूल ने वाले इन राजनेताओं को पैसे देते हैं।
सोच लो जो चुनाव इन बड़े-बड़े लोगों से जीता जाता है, वह चुनाव हमारे देश के छोटे-छोटे व्यापारियों का, गृह उधयोग का क्या भला करेंगे?? छोटे-छोटे नौकरी पेशा लोगों का क्या भला करेंगे?? गरीब लोगों की तो इनमे गिनती ही नहीं है।
अब भाई हम छोटे-छोटे लोगों ने तो मामूली मतदान ही तो डाला है ना?? जीता या तो बड़े-बड़े लोगों ने, तो हमने तो कुछ नहीं किया, फिर हमारा काम क्यों करेंगे? ये बड़े बड़े नेता...
अगर हमारी मंत्रियों को हमारे छोटे छोटे किसान, व्यापारी, गृह उद्योगों को आगे बढ़ाना है, तो इन बड़े-बड़े कंपनी, व्यापारी, मल्टीनेशनल कंपनी को बंद करना पड़ेगा और इन नेताओं के काले धन पर रोक लगानी पड़ेगी और अगर ऐसा किया तो, अगले चुनाव में यह बड़े-बड़े लोग, उन मंत्रियों को जिताने में बड़े-बड़े खर्च के लिए पैसे नहीं देंगे। तो वह कुर्सी कैसे मिलेगी?? आप समझदार हो।
‘ जागो ओर जगाओ न उल्लू बनो न बनाओ ‘
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आपके संदेश के लिए धन्यवाद । मे इस समय कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकता। मे आपको जल्दी जवाब देने की कोशिश करूंगा । ConversionConversion EmoticonEmoticon