सावन में दूध क्यों नहीं पीना चाहिए | shiv ji ko doodh kyu chadaya jata hai | आमिर को थप्पड़
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| सावन में दूध क्यों नहीं पीना चाहिए | shiv ji ko doodh kyu chadaya jata hai | आमिर को थप्पड़ |
सावन मे दूध क्यु नहीं पीना चाहिए ?? savan me dudh kyu nahi pina chahiye
नमस्कार दोस्तों सच In Short ब्लॉग में आपका स्वागत है।
सावन के महीने में दूध शिव जी को
क्यों चढ़ाते हैं, ओर महीने में क्यों
नहीं?
दोस्तों इसका जवाब हमारे आयुर्वेद में
है…
जिसमें से पहला :
जब सूरज ना उगे,
बादल छाए हो,
बारिश हो रही हो,
तब सूर्य किरणों की अनुपस्थिति में
हमारी पाचन शक्ति मंद पड़ जाती है,
जिस वजह से ऐसा कोई भी आहार नहीं लेना
चाहिए जो पचने में भारी हो।
जैसे दूध, हरी पत्ती वाली सब्जियां और फलिया यानी कठोर वगेरे।
दूसरा :
दूध पचने के बाद एसिड और गैस उत्पन्न
करता है,
जिससे पेट में एसिडिटी बढ़ती है और
शरीर में गैस बढ़ने से,
सिर दर्द, छाती में दबाव, अपच, शरीर के दर्द, बार बार डकार, शरीर में भारीपन और डायरिया भी हो जाता है।
तीसरा :
सावन में दुधारू प्राणी हरा घास - हरी
पत्तियां खाते हैं,
जिससे दुधारू जानवर के दूध में भी उन
चारों के घटक आते हैं,
जिससे आगे बताई गई वायु की कई तकलीफे बढ़ जाती है।
चौथा :
शिव जी को दूध चढ़ाने से हमारा शिवजी
के प्रति प्रेम भाव बढ़ जाता है,
और शिव जी का अभिषेक भी हो जाता है,
जिससे कि जो लोग दूध पीते हो वह भी
शिव जी को दूध चढ़ाने के बहाने दूध पीने से बचें यह समझ लोगों में फेले इसलिए शिव
जी को दूध चढ़ाते हैं।
पांचवा :
सावन के महीने में वातावरण में नमी का
प्रमाण अधिक होता है,
जिससे वातावरण में बैक्टीरिया का
प्रमाण अत्यंत बढ़ जाता हे,
और इन बैक्टीरिया को अपनी संख्या
बढ़ाने का अनुकूल वातावरण मिल जाता है,
दूध में लैक्टोज होता है जो
बैक्टीरिया का प्रिय आहार है, जिससे दूध में बैक्टीरिया का प्रमाण
बहुत अधिक बढ़ जाता है,
जिससे बीमारियां होने का खतरा भी बढ़
जाता है, इसलिए सावन में दूध नहीं पीना चाहिए।
अब दोस्तों वैज्ञानिक और धार्मिक कारण
:
जिसमें पहला :
दोस्त समुद्र मंथन के दौरान जो ज़हर
निकला वो शिव जी ने अपने गले में धारण कर लिया,
जिससे शिवजी के शरीर को जहर के प्रभाव
को घटाने दूध चढ़ाया जाता है,
क्योंकि दूध अत्यंत शीतल और जहर के
प्रभाव को शांत करता है,
दोस्तों भारत में हम देसी गाय का दूध पीते हैं,
गाय ऐसा प्राणी है जो जहर को भी पचा
लेती है,
राजीव दीक्षित जी ने एक देसी गाय पर यह प्रयोग किया कि,
गाय को थोड़ा-थोड़ा जहर देने के
बावजूद गाय के दूध पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
दूसरा :
दोस्तों बिजली पैदा करने वाली अणु
रिएक्टर को ठंडा करने के लिए उस पर पानी डालते रहना पड़ता है,
वरना वह फट जाता है,
वैसे ही शिव जी को जो एक शक्ति का
स्त्रोत है, अगर वे तांडव करें तो यह सृष्टि का
विनाश हो जाए (मतलब शिवाजी भी सृष्टि के
लिए एक अणु रिएक्टर का प्रतीक हे) ,
इसलिए उन्हें शांत करने और प्रसन्न
करने के लिए उन पर जलाभिषेक किया जाता है।
आमिर खान जैसे एक्टर जनता को नंगा नाच
दिखा कर पैसे तो कमाते हैं पर बुद्धि से पैदल होते हैं,
एक बड़ा स्टार बनने से कोई बुद्धिशाली
नहीं बन जाता, ऐसे लोग पढ़े लिखे गवार होते हैं,
आमिर के फैन भी आमिर के अंधभक्त हैं, ऐसे लोग आमिर के हर बात में हां और ना कहते रहते हैं,
ऐसे लोग सही गलत का फैसला नहीं कर
पाते और भारत की संस्कृति को गाली देते हैं,
आमिर को शिवजी के दूध चढ़ाना दूध की
बर्बादी लगती है, मगर बकरी ईद में बकरी काटना नहीं,
बेगुनाह जानवर का खून बहाना नहीं, तब इनकी बोलती बंध हो जाती है,
तीन तलाक वाली बात पर यह चुप होकर बैठ
जाते हैं,
भारत में इतना मान सम्मान और प्यार
पाने के बावजूद भारत में इनको डर लगता है,
हज के लिए सरकार से पैसा लेना इनको
ठीक लगता है, जबकि कुरान में इसकी मनाही है।
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जागो और जगाओ ना उल्लू बनो ना बनाओ
जय भारत
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