भारत देश के दुश्मन कौन है ? | सबसे बड़ा दुश्मन राजनीति

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भारत देश के दुश्मन

भारत देश के दुश्मन कौन है ? | सबसे बड़ा दुश्मन राजनीति



    प्रश्न : भारत देश के दुश्मन कौन है ???

    जवाब :
    भारत के दुशमन चीन पाकिस्तान जेसे देश नहीं हे, भारत के दुशमन तो हमारे ही भीतर हे (घर का भेदी लंका ढाये), हमारे ही राजनेता हे, जो अपने स्वार्थ के लिए जनता के पैसे बर्बाद करते हे। हमारे हे सगे संबंधी हे जो थोड़े पैसो के लिए बिक जाते हे, जो आज भी भारत को खड़ा करना नहीं चाहते।

    जो खेती, पशुपालन और गृह उधयोगों को आगे बढ़ने नहीं देते और टेक्नोलोगी के नामसे लोगो को भ्रमित करते हे...   


    पहला () : जनसंख्या विस्फोट - कैसे ??

    आपको पता ही है, एक घर में 10 लोग हो और कमाने वाला एक, तो उस घर में खाने पीने के तो लाले होने ही है। आज हमारे देश में लोगों की संख्या तो बढ़ रही है, पर उनको देने के लिए काम, धंधा, नौकरियां नहीं है। वह लोग क्या करेंगे??

    फिर आप कहोगे क्राइम “ बढ़ रहा है। यही होगा, लोग करें तो क्या करें? कुछ लोग समझते ही नहीं और सरकार को तो कुर्शी के अलावा कुछ दिखता ही नहीं।

    नियम बनाओ की अबसे हर एक घर में एक ही बच्चा होना चाहिए, अगर दूसरा हुआ तो उस परिवार को देश निकाला दिया जाएगा। इसमें सब के लिए यह नियम समान रूप से लागू हो, कोई अपवाद तो हरगिज़ ना हो।


    दूसरा (२) : गरीबी – कैसे ??

    अब भारत देश में जहां लोग एक कमरे में भेड़-बकरियों की तरह ठुसे जाते हो, वहां गरीबी तो होनी ही है। इसमें आश्चर्य क्या है? इतने लोगों को खाना, पीने का पानी, रहने को घर देने जाए, तो देश के सब लोग भिखारी हो जाए।

    मगर फिर भी थोड़ी कम गरीबी है इस देश मे ऐसा आंकड़े कहते हैं। मगर मेरे मुताबिक अगर लोगों को जरूरयात के हिसाब से खाना-पीना ना मिले तो उससे ज्यादा गरीबी और तो क्या होगी?

    आज हमारे देश में हालत यही है, क्योंकि आज के मध्यमवर्गीय लोगों के पास अभी दाना पानी तो है, मगर रहने के लिए छत बनाना असंभव होता जा रहा है और अगर उसमें भी भयंकर बीमारियां, अकस्मात हो जाए तो वह पूरा परिवार आर्थिक रूप से कंगाल हो जाता हे।

    गरीबी के कारण ही इस देश में ₹100 में मत बीकता है,
    गरीबी के कारण लोगों में हिम्मत नहीं होती, कि सत्ता के खिलाफ आवाज उठाएं,
    गरीबी के कारण लोग डरते हैं कि, कही मुझे नौकरी से ना निकाला जाय,
    गरीबी के कारण लोग धर्म परिवर्तन किए जा रहे हैं,
    गरीबी के कारण लोग शिक्षित नहीं हो पाते और बिना सोचे समझे किसी की भी बात सच मान लेते हैं,
    गरीबी की कारण ही आतंकवादी बनाए जाते हैं और आतंकवाद फैलाया जाता है।


    तीसरा (३) : शिक्षा कैसे ??

    दोस्तों बहुत ही महत्वपूर्ण है कि, जिसको जैसा शिक्षण मिलेगा, वैसा ही वह बनेगा।

    हमारे देश में सबको मेकॉले की शिक्षण नीति “ पढाई जाती है, जिसका एक ही उद्देश्य था, नौकरशाही “ आज की शिक्षण पद्धति से खाली क्लर्क “ ही उत्पन्न होते हैं। देख लो, आज समाज में सबको नौकरी ही चाहिए, पढ़ लिख कर उसे नौकर ही बनना है और सब माता-पिता अपने बेटी-बेटो को नौकर ही बनाना चाहते हैं।

    अब ऐसे नौकर, जो अपने ऊपरी अधिकारियों से भी हिम्मत से बात नहीं कह सकते, वे अन्याय के खिलाफ क्या आवाज उठाएंगे? उनको या तो डॉक्टर बनना है, या इंजीनियर या सरकारी नॉकर बनना हे।

    कुछ नहीं तो प्राइवेट नौकरी, बस यही सोचते हे। जो हमारे देश में पढ़ते नहीं है, वह नेता बन जाते हे और हम पढ़े लिखो पर अपना हुक्म चलाते है।

    यह शिक्षण भी अंग्रेजी में होता हे, देख लो भाई, यहां कोई भी शिक्षण ऐसा नहीं जो बच्चों को अपने पैरों पर खड़ा कर सके, या खुद अपना व्यापार धंधा चला सके, बस नौकर बना सके, फिर कहा जाएगा देश खड्डे में!! क्यों? क्योंकि जब अनपढ़, बे समझ लोग राजनीति करेंगे, तो ऐसा ही करेंगे।


    चौथा (४) : सरकार – क्यों ??

    अब हमारी सरकार (मतलब हमारे ही चाचा, मामा, ताया, जाती वाले, भाई,परिवार वाले आदि) चाहते नहीं, कि लोग ऊपर उठे, आगे बढ़े, तरक्की करें, क्योंकि अगर यह लोग आगे बढ़ गए, तो हमको कौन पूछेगा?

    आज हमारे परिवार में भी यही होता है, भाई भाई का भला नहीं चाहता, परिवार एक दूसरे से स्पर्धा में उतर ते हे, कि कहीं कोई हमसे आगे ना बढ़ जाए।
    बस हमारी सरकार भी ठीक यही चाहती है, कि लोग गरीब, अशिक्षित रहे, ताकि हम उनको दबा सके, उनके ऊपर राज कर सकें, क्योंकि भूखे नंगे लोगों को जब खाना ही पूरा नहीं मिलेगा, तो यह क्या हमारे सामने सर उठाने की हिम्मत करेंगे।

    इनको तो बस अपनी कुर्शी से प्यार है, खुद अपनी तिजोरी भर लेते हैं, स्विस बैंक में और भारत में दिखाते हैं मेरे पास तो कुछ नहीं है!!!


    पांचवा (५) : जातिवाद - क्यों कैसे ??

    मैंने पहले भी इसके बारे में बताया है कि, हमारे माता-पिता ने, या सरकार के जन्म प्रमाण पत्र ने, हमारे ऊपर थप्पा लगा दिया है, कि तुम फलानी जाति के हो। बस फिर क्या, हमने मूर्खों की तरह मान लिया, कि हां मैं हूं।

    फिर क्या राजनीति वाले आपको भड़काएंगे, अपना उल्लू सीधा करेंगे, और आप भी चिल्ला चिल्ला कर उनकी हां में हां मिलाएंगे।

    क्योंकि कोई आपको गधा कहेता हे, ओर आप मान लेते हो, कोई आपको कुत्ता कहेता हे, ओर आप मान लेते हो, कोई आपको शेर कहेता हे, ओर आप मान लेते हो।

    जब हम भारतीय आपस में बटे हुए हैं, तो देश में एकता कैसे आएगी?? कोई सरकार जातिवाद नहीं मिटा शकती, यह काम आपका-हमारा है, हमें ही करना है।


    छठा (६) : लोकतंत्र – कैसे ??

    लोकतंत्र में क्या होता है, सब लोगों के हाथ में होता है, मतलब एसे लोगों के हाथ में होता है, जिसे यह नहीं पता, कि कौन सही है? कौन गलत?

    कोई भी जरा सी समाचार पत्रों, दूरदर्शनो में फैला दें, वही बात सही मान लेते हैं। कोई भी उनको पैसा देकर खरीद सकता है। कोई भी झूठे वादों से उनके चक्कर में आ जाता है।

    यह लोग अपने जाति वाला कैसा भी हो, उनको ही जीताते हैं। इनके पास समय ही नहीं है, कि जाकर उन नेताओं से पूछे तुमने इतने पैसे कहां खर्च किए? इतने सालों में क्या किया?

    इन लोगों के पास अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की ताकत ही नहीं है। यह अभी भी अपने को गुलाम मानसिकता से आजाद नहीं कर पाये, ऐसी कान की कच्ची, मुर्दा दिल, वीरता हीन, जनता के हाथ में अगर कुछ चुनने को कहा जाए, तो यह डर के मारे बोलना ही बंद कर देती है। इन से क्या आशा रखी जाए?


    सातवां (७) : सत्ता का दुरुपयोग – कैसे ??

    इस देश में सत्ता का जितना दुरुपयोग होता है, उतना तो शायद कहीं भी नहीं होता होगा। यहां डॉक्टर, जज, वकील, इंजीनियर, पोलिस और राजनेता सब ही अपनी सत्ता का दुरुपयोग करते हैं।

    अरे मेरे भाई, हम भी तो आपके ही मित्र भाई बहन हैं, हमसे इतना भी क्यों नाराज हो? लगभग डॉक्टर अपने यहां आने वाले दर्दी की आमदनी देखकर ही उसका इलाज करते हैं।

    कभी तो यह लोग गरीब की आर्थिक स्थिति देखे बिना ही उनको खर्च की खाई में धकेल देते हैं। और अगर ऐसा कहे तो उनको बुरा लगता है। अरे भाई सब नहीं मगर लगभग सभी ऐसे ही है।

    इस देश में तो जज भी बिक जाते हैं, इंजीनियर भी बिक जाते हैं, वकील भी पुलिस भी इनके पास जाओ, जैसे आप गुनेगार हो, ऐसा वर्तन देखने को मिलता है। अरे भाई, आप लोग सब के साथ एक जैसा व्यवहार क्यों करते हैं?

    कुछ तो शर्म करो। लगभग सभी का यही हाल है। प्त्रकारत्व तो इतना बिक गया है, कि यह लोग गुनहगार को नहीं, बेगुनाह को गुनहगार साबित करते हे। इनको किसी की इज्जत की कुछ नहीं पड़ी, कोई गुनाह में पकड़ा जाए, यह दिखाते हे, बेगुनाह छूटे वह नहीं!!!


    आठवां (८) : खेती का पतन – कैसे ??

    जो देश अपना अनाज खुद पका सकता है, उसे दूसरों के पास से भीख नहीं मांगनी चाहिए। हमारे देश का अनाज, हम खुद पका सकते हैं, हमें इसके लिए किसी दूसरे देश पर आधारित नहीं रहना पड़ता।

    मगर हमारे देश की जमीन को बड़ी-बड़ी कंपनियों के खाद और जंतु नाशक दवाओं के उपयोग से बंजर कर दिया गया है। हमारी मिट्टी को दूसरे देशों में बेचा जा रहा है। हमारे देश के जंगलों को नष्ट किया जा रहा है। इससे बारिश होने के बावजूद खेती में अनाज पूरी तरह तरह नहीं पक रहा।

    इन रासायनिक खातरों को खरीद कर, देश के किसानों के साथ धोखा हो रहा है और यह किसान समझ नहीं रहा, हमारे देश अनाज के लिए अगर स्वतंत्र हो जाए, तो हम अनाज को बेचकर ही किसान को सिंचाई के लिए पानी खर्च कर सकते हैं। लेकिन हमारी सरकार यह नहीं चाहती।


    नवा (९) : मल्टीनेशनल कंपनियां और फैक्टरीया – कैसे ??

    यह मल्टीनेशनल कंपनीयो ने हमारे देश के छोटे-छोटे लघु उधयोगो को बंद कर दिया है। और बड़े-बड़े स्टोर, छोटे व्यापारियों का व्यापार बंद कर रहे हैं।

    यह ऑनलाइन कंपनियां, अपनी सस्ती चीजों को बेचकर, छोटे व्यापारियों का रोजगार छीन रही है। यह सब बंद होना चाहिए।

    जब तक हर एक व्यक्ति को छोटा सा व्यापार उद्योग नहीं मिलता, तब तक देश का हर नागरिक अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता।

    क्योंकि सबको नौकरी मिल नहीं सकती इतनी नौकरियां है ही नहीं। और इन नौकरियों से व्यक्ति अपनी दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से जुटा पाता है, वह अपने पैरों पर क्या खड़ा होगा?


    दस (१०) : टेक्नोलॉजी – कैसे ??

    टेक्नोलॉजी से क्या होता है? एक हजार व्यक्ति का काम एक व्यक्ति कर लेता है। इससे विकास होगा या विनाश? टेक्नोलॉजी उन देशों में कारगर है, जहां काम करने को लोग नहीं मिलते, जहां जनसंख्या कम है।

    जहां पहले से ही जनसंख्या ज्यादा है, वहां टेक्नोलॉजी कुछ काम की नहीं, उल्टा व्यक्ति बेकार होंगे और बेरोजगारी बढ़ेगी, गरीबी बढ़ेगी, अशिक्षा बढ़ेगी, जिससे चोरी-चकारी बढ़ेगी।( बिहार को देख लो)

    फिर भी कुछ मूर्ख लोग इस देश में टेक्नोलॉजी की क्रांति जैसी बड़ी बड़ी बाते करते हैं। कुछ चीज वस्तु तक टेक्नोलॉजी सही है, लेकिन बड़े पैमाने पर यह बहुत ही बुरा असर करती है, आज हमारे देश में यही हाल हुआ है।


    ग्यारवा (११) : भारी टैक्स यानी कर – कैसे ??

    “ जहां जाओ वहां टैक्स “ यह भारत सरकार का नारा है।
    जिस देश का राजा या सरकार ज्यादा कर वसूल करती है, इसका मतलब उस देश की आवक कमाई का का और कोई जरिया है ही नहीं। वहां की प्रजा बेईमान ही बनेगी।

    हमारी सरकार पहले तो हमारी कमाई में से टैक्स काटती है, फिर हमारे किराने की खरीदी पर टैक्स काटती है, फिर मकान दुकान पर टैक्स काटती है, फिर टोल टैक्स भी काटती है, फिर कपड़े खरीदने पर, गहने लेने पर, गाड़ी लेने पर, यहां तक कि हम रेस्टोरेंट में खाना खाने जाते हैं वहां भी टैक्स काटती है।

    सोच लो... भाई हम थोड़ी बहुत कमाई कर भी ले, तो यह सरकार लगभग तो सब कुछ काट लेती है, उसके अलावा भी हर जगह बस हमारी जेब पर ही नजर रहती है।

    लोग टैक्स चोरी करते हैं कि, हम रात-दिन मेहनत करें और सरकार को दे। खासकर मध्यम वर्ग वालों को बहुत ज्यादा टैक्स से घाटा आता है, क्योंकि एक तो ईमानदारी से कमाओ, फिर टेक्स में गवाओ, बदले में मिलता क्या है? महंगाई, भ्रष्टाचार, आतंकवाद वगैरा-वगैरा...

    और हां सरकारी नौकर, जो हमारे टैक्स के पैसों पर जलसा करते हैं, उनकी हर साल महंगाई भत्ता बढ़ता है। हमारा क्या??

    हमको तो पाई पाई का हिसाब देना पड़ता है, जब मतदान के लिए जो प्रचार प्रसार होता है, उनका किसी को कुछ हिसाब देना नहीं पड़ता। 5 साल पैसे कहां खर्च किए? उसका कुछ हिसाब नहीं दिया जाता, अंग्रेज चले गए उनके प्यादे अभी भी इस देश में पैदा हो रहे हैं।


    बारवा (१२) : लघु उद्योगों का पतन – कैसे ??

    अगर सब के पास कुछ ना कुछ काम होगा, तो सब अपने रोजगार खुद खड़ा कर देंगे। आज से 500 साल पहले हमारे भारत में सब के पास रोजगार था, वह इन कंपनियों के वजह से नहीं, लघु उद्योग के वजहसे था।

    यह लघु उद्योगों की चीजें हम दूसरे राज्य में नहीं बेच सकते, बड़ी कंपनी खड़ी नहीं कर सकते, इन नियमों के जरिए इसमें सफलता मिलेगी। अगर जीवन जरूरी चीजें हमारी आसपास मे बनेगी, मिलेगी तो हमको सस्ती मिलेगी, शुद्ध मिलेगी।

    जिसको भी अपना काम चलाना है, वह चीजें तो अच्छी ही बनाएगा। वरना बिकेगी नहीं। देख लो चीन में इतनी संख्या होने के बाद भी लोगों के पास कुछ ना कुछ काम है। लेकिन फिर भी जनसंख्या नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है।


    ‘ जागो ओर जगाओ न उल्लू बनो न बनाओ ‘ 

    आशा हे आपको यह लेख पसंद आया होगा, तो कृपा करके इसे शेर जरूर करे और दूसरों को भी जगाने मे सहायक बने। धन्यवाद।  

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