जूते चप्पल क्यों पहने? | जूतो के फायदे ओर नुकसान | जूतो के प्रकार

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जूते चप्पल क्यों पहने? | जूतो के फायदे ओर नुकसान | जूतो के प्रकार
जूतो के फायदे ओर नुकसान


    जूते चप्पल क्यों पहने? | जूतो के फायदे ओर नुकसान | जूतो के प्रकार


    प्रश्न : जूते चप्पल पहनना क्यो जरूरी है???

    देखो.. वैज्ञानिक खोपड़ी मतलब हमारे ऋषिमुनी कहते हैं की,
    “ हमारा शरीर एक ऊर्जा का स्रोत है, जो एक मैग्नेट (लोह चुंबक) की तरह कार्य करता है,
    और यह पृथ्वी मे भी गुरुत्वाकर्षण है,
    तो हमारे शरीर की छोरो से, जैसे उंगलियां, हाथ, पैर के तलवे, से यह उर्जा बहती रहती है,
    अगर इसको पृथ्वी का स्पर्श मिले तो पृथ्वी हमारी ऊर्जा खींच लेगी,
    तो इसलिए हमें जूते चप्पल पहनना जरूरी है।“

    अरे भाई! तो कांटे पत्थर से बचाव का कोई मतलब नहीं है?
    ना भाई! इन से कोई मतलब नहीं है, यह तो एक साइड बेनिफिट है।


    प्रश्न : सबसे अच्छे जूते किस चीज के होने चाहिए???

    लकड़ी (wood) :

    1. सबसे बेहतर अर्थिग रोधी है लकड़ा,
    2. लकड़ी की खड़ाऊ पहेननी चाहिए।
    3. यह पेरो की कुदरती स्थिति बनाए रखती हे।
    4. अरे भाई क्या बकवास कर रहे हो!!!
    5. ऑफिस में खड़ाऊं पहन के जाऊं????
    6. लकड़ी की खड़ाऊ का लेटेस्ट वर्जन भी तो कुछ निकालो, (काम चल रहा है...)

    चमड़ा (Leather) :

    उसके बाद आता है चमड़ा (अगर आपको प्राणियों से प्यार नहीं है तो),
    लेकिन चमड़े की मोजड़ी हो तो अच्छा है,
    उसके जूते पैरों को नुकसान कर कते हैं।
      

    रबड़ (Rubber) :

    उसके बाद रबड़ भी पहन सकते हैं,
    रबड़ कुदरती पेड़ो से मिला होना चाहिए।
    कृत्रिम रूप से बना न हो।
      

    कपड़ा (canvas) :

    बाकी कपडे के जूते भी पहन सकते हैं।
    केनवास के जूतो का तला तो रबर का ही आता हे।
    पसीना सोखता है,
    धोने में आसानी है।  
      

    प्लास्टिक (plastic) :

    प्लास्टिक हर तरह से खराब है, तो प्लास्टिक अवॉइड करें।
    वह पैरों के तलवों से शोखा जाता है और खून में मिलकर हमें बीमार करता है।
    तो प्लास्टिक की चप्पल ना पहने।
      

    नायलॉन (nylon) :

    नायलॉन ठीक है, वह सिंथेटिक फैब्रिक से बनता है, तो जितना हो सके ना पहने।
    नायलॉन पर कई रंगक (dye) उपयोग की जाती हे।
    वह मजबूत हे पर शरीर के लिए सही नहीं हे।
    उसी तरह साटीन (Satin) डेनिम (Denim) पर भी केमिकल प्रोसेस होते हैं,
    जो पैरों के तलवों के लिए और उससे हमारे शरीर के लिए हानिकारक है।
      
    आजकल जूते चमड़े, पॉलिस्टर, रुई, नायलॉन, सिंथेटिक चीजे, रबर, फ़ोम(plastic) से बनते हैं, यह आपको कई तरह के से नुकसान और बीमार करते हैं।


    प्रश्न : अरे भाई फेंकना बंद करो जूते से बीमारी???


    हां भाई!! देखो मैं आपको बताता हूं,
    साइंटिफिक खोपड़ी से कि हमारे शरीर के कुछ ऐसे भाग है,
    जो बहुत सेंसिटिव होते हैं, तुरंत चीजें ग्रहण करते हैं,
    जैसे हाथ पैर के तलवे,
    सिर की चोटी वाला हिस्सा,
    नाक, आंख, कान  वगेरे।

    आंख के सामने प्याज काटने से आंसू आते हैं,
    नाक के सामने धूल-धुवे से छिके आना,
    तीव्र आवाज से कान के पर्दे फटना,
    करेले को जूते में रखकर चलो मुंह में करेले का स्वाद आएगा,
    यह करके देखो आपके पैरों की सेंसिटिव आपको पता चल जाएगी।
    यह सबूत है ..

    नहीं मानोगे तो ठीक है...
    एक ओर प्रयोग बताता हूं...
    आप गर्मियों में सरसों का तेल 10 मिनट तलवों में घिसो,
    या खुब ठंडी में पे ठंडे पानी में रखो, या 10 मिनट घी को घिसो,
    देखो क्या हालत होती है, फिर बताना मुझे...

    अरे भाई मत बताना....
    वैसे ही आपको गर्मी में लू लगे,
    नॉर्मल बुखार आए तो पैरों के तलवों पर प्याज घीसकर सो जाओ,
    बुखार चला जाएगा, सर्दी भी चली जाएगी भाई गैरेंटी देता हूं।
    लेकिन बुखार नॉर्मल होना चाहिए, डेंगू, मलेरिया नहीं वरना मुझे मरवा दोगे....

    तो यह जूते जो केमिकल से बने होते हैं, वह पैरों की गर्मी से लो द्वारा पसीने से मिलकर हमारे शरीर में चले जाते हे और हमें मालूम भी नहीं पड़ता की हम इससे बीमार पड़े हैं...

    मान गए?  किसे?  मेरी खोपड़ी को और किसे?
    नहीं भाई यह तो हमारे पूर्वजों की देन है... मैं तो निमित्त हूं...
    तो आप जूतों का चयन सावधानी से करें और स्वस्थ सुखी रहे।


    प्रश्न : कैसे जूते नहीं पहनने चाहिए???


    हाई हील के जूते से पैरों की जो कुदरती स्थिति है वह विपरीत होती है।
    जिससे हमारे शरीर की सेंटर ऑफ ग्रेविटी (केन्द्रबिन्दु) बदल जाती है और हमारी हड्डीया दर्द करती हे, गिरने का खतरा रहता है, मोच आ सकती है।

    ज्यादा टाइट जूतों से पैरों की हड्डियों और त्वचा में दर्द परेशानी हो सकती है।
    कई बार फंगस लग जाती हे, जिससे दाद, खाज, खुजली होती हे।

    बहुत ज्यादा बड़े जूतों से चलने में तकलीफ और गिरने का खतरा बना रहता है,
    अच्छा किया भाई आपने बता दिया मुझे तो पता ही नहीं था!!!


    जुते बनाने का आदर्स नियम क्या हे???

    हमेशा पैरों के तले समतल रहे,
    हवा आ जा सके,
    पेरो की कुदरती स्थिति बनी रहे,
    बहुत मोटे सोल वाले जूते अच्छे नहीं,
    योग्य साइज ओर नंबर के हो,
    बहुत ऊंचे न हो,
    बहुत टाइट ना हो।



    प्रश्न : स्पोर्ट्स शूज पहनने चाहिए कि नहीं???

    आजकल खिलाड़ी खेलकूद के लिए अपने जूते कुदरती स्थिति के अनुरूप बनाते हैं।
    आपने देखा होगा कई दौड़ लगाने वाले खिलाड़ी बिना जुतो के दौड़ते हैं।
    जिससे उसके पैरों में तकलीफ ना हो, ज्यादा अच्छी तरीके से दौड़ सके।
    आजकल कल जो स्पोर्ट्स शूज मिलते हैं, उसमें पैरों के तलवे समतल नहीं होते,
    जिससे लंबे समय के बाद पैरों कीड्डीया और घुटनों में तकलीफ होती है,
    कई बार कमर को भी नुकसान होता है।
    साइंटिफिक मतलब वैज्ञानिक तरीकों से जो जूते बनाए जाते हैं,
    वे कहते हैं कि, यह दौड़ने के लिए आपके पैरों को छाल देते हैं,
    लेकिन यह लंबे समय के अनुभवों से पता चला है कि इससे नुकसान ही होता है।



    प्रश्न : क्या जुतो के साथ मोजे पहने???

    अगर आप चप्पल, मोजड़ी, सेंडल पहेनते हो तो मोजे ना पहेने,
    अगर आप पूरे पेर ढक जाय ऐसे जूते पहेनते हो तो मोजे जरूर पहेने।
    मोजे हमेशा कॉटन के ही पहेने ताकि पसीना सोखे।
    मोजो को हररोज बदलना चाहिए।



    प्रश्न : जुतो के कुछ साधारण नियम ओर देखभाल क्या हे???


    अगर आप एक ही जूते लगातार पहनते हैं, तो उससे बदबू आती है,
    और उस जूते का मटेरियल खराब हो जाता है,
    इसलिए जूतों को बदल बदल कर,
    या तो धोकर अलग-अलग जूते पहनने चाहिए।
    जुतो को ज्यादा घंटे (4 से 5 घंटे) ना पहेने।
    अगर ज्यादा घंटे पहनने पड़े तो बीच बीच मे थोड़ी देर उतारते रहे।

    तुटे हुवे ओर बहुत साल पुराने, खराब दिखने वाले जूते कभी ना पहेने।
    जुतो को पोलिश कर के ही पहेने।
    या तो उसको साफ करके पहेने।
    वरना आप की इमेज खराब हो शकती हे।
    ओर पेर भी खराब हो शकते हे।


    प्रश्न : शादी में जूते चुराने की के पीछे का रहस्य क्या है??? या यह कोई रिवाज हे???


    पहले के जमाने में लोग अपनी दुश्मनी शादी जैसे मौकों पर निकालते थे।
    क्योंकि उस समय आप दुश्मन के घर में जाए तो किसी को शक नहीं होता,
    लो जूतों में हर डाल देते थे, जो धीरे धीरे पैरों के तलवों से पूरे शरीर में फैल जाता था और लोगों की मौत हो जाती थी।
    तो दूल्हे को कोई मार ना दे, इसके लिए दुल्हन के घर वाले दूल्हे के जूते चुरा कर किसी अच्छी जगह रख देते थे।
    और दूल्हे के जाने के समय उस सुरक्षित जीतो के बदले दूल्हा कुछ पैसा देता था।
    बादमे यह रिवाज बना...
    तो जूते छुपाने के पीछे यह विज्ञान छुपा है।

    ***

    हमारे पूर्वज जुतो से लोगो की पहचान करते थे!!!
    कैसे???
    लकड़ी के जुते तो वह व्यकती ज्ञानी,
    चमड़े के जुते तो संसारी,
    फटे जुते तो मजदुर,
    साफ जुते तो व्यापारी,
    और जुते के विविध प्रकार से उसके पास रहा धन नापा जाता था।
    आज तो चोर भी सूट पेंट मे ना आए, तो लोग पहचान लेते हे,
    ओर बड़ा आदमी साधारण कपड़ो मे ना निकले, तो इनकम टेक्ष वाले पहेचान लेते हे।


    ‘ जागो ओर जगाओ न उल्लू बनो न बनाओ ‘ 

    आशा हे आपको यह लेख पसंद आया होगा, तो कृपा करके इसे शेर जरूर करे और दूसरों को भी जगाने मे सहायक बने। धन्यवाद।   

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