कपड़ो के फायदे, कपड़ो के नुकसान, क्लॉथ के प्रकार, कपड़ो का उपयोग in Hindi, Cloth side effects in Hindi, Cloth ke prakar, Cloth ke naam, Cloth ke bare mein, Cloth ke nuksan, Cloth ke fayade.
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| कपड़ो के फायदे ओर नुकसान |
कपड़ो के फायदे ओर नुकसान | क्लॉथ के प्रकार | कपड़ो का उपयोग in Hindi
भारत गर्म (समान्य गर्म) प्रदेशों में आता है। इसलिए इसका पहेनावा भी
वैसा हे।
प्रश्न : भारत का पहेनावा क्या था ओर क्या होना चाहिए???
- भारत में धोती कुर्ता वह भी शुद्ध कोटर्न से बना पहनते थे,
- सर पर पघड़ी पहनते थे,
- पैरों में खुली जूतियां पहनते थे।
- ताकि पूरा शरीर खुला रहे, पसीना सोख लिया जाए, या तो हवा से सूख जाए,
- पेर खुले रहे यह सब गर्म प्रदेश होने का संकेत है।
तो भाईसाब आप ही बताओ
क्या पहेने??
प्रश्न : भारत के लिए सबसे अच्छे कपड़े कौन से हे??? किस कापड़ से बनते हे???
रेशम (Silk) :
- सबसे अच्छा कपड़ा रेशम यानी सिल्क का माना गया है,
- जो पूरी तरह
सात्विक भी है,
- क्योंकि वह पूर्ण
वातानुकूलित होता है,
- शरीर से चिपकता
नहीं है,
- चमड़ी को अच्छा स्पर्श महसूस करवाता है।
- रेशम (Silk) एक कुदरती प्रोटीन स्ट्रक्चर है।
- रेशम गर्मी में ठंडी और ठंडी में गर्म लगती है।
- रेशम अपने वजन से 30 गुना ज्यादा पसीना सोख सकती है।
- यह आसानी से धुल जाती है और सुख भी जाती है।
- रेशम बहुत मजबूत होता है और लंबे समय तक टिकती है।
- भाइयों बहनों आप समझदार हो।
- ज्यादा क्या कहूं???
रुई (Cotton) :
- उसके बाद आता है
रूई यानी कॉटन का कपड़ा,
- जो गर्मी शोखता है,
- शरीर से चिपकता
नहीं है,
- इसलिए बेहतर है।
प्रश्न : सर पर पघड़ी रखना नहीं पसंद क्या करे??? पघड़ी क्यो रखते हे???
देखो भाईओ..
सर पर पघड़ी इसलिए रखनी चाहिए,ताकि तेज धूप से
हमारे CPU की रक्षा हो, मतलब ब्रेन (दिमाग)(भाई भूसा भरा
होगा तो समझ नहीं आएगा).
दूसरा कभी भी
ज्यादा हवा लगे, तो उसे ओढ़ भी शकते हैं,कान भी बंध रहते हैं,तो पघड़ी पहनने के कई फायदे हैं।
अगर आप को पघड़ी नहीं पहेननी तो टोपी रखो मगर सर को ढको।
टोपी भी सफ़ेद रंग की हो तो अच्छा हे काली होगी तो गर्मी
शोखेगी,
पुराने जमाने मे स्त्रीया सर ढकती थी उसका यह भी एक कारण
हे।
लोग अपनी गाड़ी, कंप्यूटर, CPU
आदि को तो कवर लगाते हे, पर सर को कवर नहीं
करते।
प्रश्न : कमजोर यादशकती, सफ़ेद बाल, सरदर्द, चश्मा, कील मुहासों का कारण क्या हे???
आज लोग नंगे सिर
फिरते रहते हैं,जिससे सूर्य के तेज किरने सीधी सर पर पड़ती हे, जिससे
मगज की नसो का खून ओर मस्तिष्क जल गर्म हो जाता हे ओर उसकी कार्यप्रणाली बिगड़ जाती
हे।
जिससे मेमोरी करप्ट यानि यदास्त
कमजोर हो जाती हे।
फिर शंखपुष्पी पीने से क्या होगा ....??
शरीर के सभी अंगो के केंद्र सर मे होते हे,
तेज धूप से सुनने, देखने, पचाने, चेतातन्त्र के, विविध अंगो के केन्द्रो को नुकशान
होता हे,
जिससे लोगो की नजर कमजोर होती हे..
सुनने की शक्ति कम होती हे..
उम्र से पहले बाल सफ़ेद होते हे..
सर खुला रहेने से मुह की तैल ग्रंथि मुह को ठंडा रखने के
लिए ज्यादा तैल छोड़ती हे, जिसके ऊपर धूल मिट्टी चिपकनेसे कील मुहासे
ज्यादा बढ़ते हे।
सिरदर्द बढ़ने लगता हे..
लोग तेज धुप से आते ही फ्रिज का ठंडा पानी (4 से 8 डिग्री)
पी लेते हे,जिससे शरीर का तापमान (37 से 45 डिग्री) मे अचानक बहुत बड़ा
बदलाव आता हे,
जिससे मगज की पतली नसो मे खुन तेजी से बहता हे ओर मगज को
बहुत ही ज्यादा नुकशान करता हे। एसा बार बार होने से..लोगो की मानसिक शक्ति कमजोर हो जाती हे,ओर जिससे उनका पूरा शरीर रोगो का घर बन जाता हे।
अरे भाई हम तो कपड़ों पर
थे!!
प्रश्न : दूसरे कपड़ो के कौन से फायदे हे??? (थोड़ा ओर समजे)
आज भी भारत के हर
एक राज्य का ट्रेडिशनल पहनावा, मतलब वहां का
पुराना पोशाक, या तो वह रेशम या तो प्योर कॉटन से बना होता है।
यही बताता है, कि स्वस्थ रहना है, तो अपना पूरी
तरह वैज्ञानिक पहनावा पहनो और स्वस्थ, सुखी रहो।
भारतीय पोशाक पूरी तरह ऑर्गेनिक है।
इसे पहनने से
हमें पूरी तरह कंफर्टेबल लगता है,
यहां वहां कुछ
खींचा खींचा नहीं लगता।
थोड़ा आध्यात्मिक
द्रष्टि से....
सिल्क, कॉटन, वूल से...
शरीर शांत रहता
है,
मन शांत रहेता हे,
और शरीर स्वस्थ रहता है।
नयलोन (Nylone), रेयॉन (Rayon) से...
शरीर अशांत बनता
है,
मन अशांत बनता हे,
और अस्वस्थता आती
है।
प्रश्न : जीन्स जेसे टाइट कपड़ो से कोई नुकशान होता हे???
जैसे एकदम टाइट
जींन्स त्वचा के रोम छिद्र ढक
देती है,जिससे शरीर के
नीचे के अंगो में से रक्त प्रवाह ऊपर नहीं जा पाता,और हवा पानी का
शरीर में प्रवाह ना रहने से शरीर गर्म होता है और बीमारियां होती है,त्वचा की अनेक
बीमारियां भी इसीसे होती है।
पुरुषों के शुक्राशय
का तापमान (32 से 34 डिग्री सेंटीग्रेट) हमारे शरीर के तापमान (37 डिग्री सेंटीग्रेट) से 4 डिग्री सेंटीग्रेड कम होता है,वरना शुक्र को
नुकसान होता है,टाइट और झाड़ी
मोटी जींन्स पहनने से वृषण का तापमान बढ़ता है,जो शुक्राणु (seprm)
की कमी ओर नपुंसकता लाता है।
प्रश्न : क्या गले मे टाई पहेननी चाहिए???
गले में टाई (कुत्ते
का पट्टा) पहनना हमारे यहां फैशन में हो गया है!!!
अरे भाई पश्चिम में
उनको ठंड लगती है इसलिए गला बांधते हे,
आप क्यों यह पट्टा लगाकर घूमते हो,
कोट भी ऐसा ही है, पता नहीं पढ़े लिखे गधे क्या-क्या पहनते हैं!!!
(जीतने ज्यादा पढ़े लिखे, उतने ही मूर्ख,
देखलों बड़े बड़े डॉक्टर, वकील, वेपारी
टाई कोट पहेंनकर घूमते हे।)
दूसरा पश्चिम मे उनको बार बार सर्दी से नाक बहती हे, उसको
पोछनेके लिए भी उपयोगी हे, एसा मेने सुना हे।
भारत में टाई पहनने से शरीर की गर्मी और बढ़ती है,
गले के आसपास गर्मी रहने से उस जगह पर फंगस लगती है,
जिससे दाद, खाज, खुजली, एलर्जी होती
है।
(आश्चर्य की बात यह है, की भारत की स्कूल वाले भी
बिना सोचे समझे बच्चों को टाई-कोट पहने के लिए मजबूर करते हैं और हमारे यहां तो
अंग्रेजों का अनुकरण करने का शौक है, इसलिए हम दूसरों की नकल
करते हैं और नकल में अकक्ल तो होती नहीं)
प्रश्न : सूती कपडे किससे बनते हे??? उसके फायदे क्या हे???
यह कुदरती रेशा
है।
यह दवा की तरह
काम करता है।
जिसमें से कुछ इस
प्रकार है..
रुई (Cotton) : कपास के पौधे से
सूती कपड़ा बनता है।
लिनन (Linen) : अलसी के पौधे से बनता है।रेशम (Silk) : रेशम के कीड़ों से रेशम बनता है।
लिनन (Linen) : अलसी के पौधे से बनता है।रेशम (Silk) : रेशम के कीड़ों से रेशम बनता है।
यह नुकसान कारक
नहीं है।
नरम आरामदायक है।
त्वचा छिद्र खुले रखता है, जिससे चमड़ी
बीमार नहीं होती प्रफुल्लित रहती है।
गर्मी से बचाव
होता है और पसीने से भी बचाव होता।
सर्दी में गर्म
और गर्मी मे ठंडे होते है।
(आजकल तो लोग जींन्स पहन कर गर्मी गर्मी बोलते रहते हे..)
कीटाणु को नष्ट करते हैं। (पाउडर लगाने की जरूरत
नहीं रहती)
पसीना सोखते हे।
इसमें हानिकारक
केमिकल नहीं होते, जिससे चमड़ी की
बीमारियां नहीं होती।
इसलिए अंत:वस्त्र इसीसे बनते हे।
आसानी से धुल शकते हे और सूखा भी सकते है।
आज आप धोती, कुर्ता, पघड़ी ना
पहने तो कुछ नहीं, परंतु इन कुदरती रेशों से कपड़े शिलकर तो
पहन सकते हैं। और सर और पैरों को अच्छी तरह ढक शकते हो।
इसमें कोई
मस्टर्ड, मतलब राय, मतलब सालाह, सूचन, सुझाव हो तो
कृपया नीचे कमेंट करें... धन्यवाद।
‘ जागो ओर जगाओ न उल्लू बनो न बनाओ ‘
आशा हे आपको यह लेख पसंद आया होगा, तो कृपा करके इसे शेर जरूर करे और दूसरों को भी जगाने मे सहायक बने। धन्यवाद।
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