पानी ‘ जल ही जीवन है ’ | पानी के बारेमे जानने योग्य सब कुछ | R.O. पानी पीना चाहिए ? | पानी का विज्ञान | पानी एक औषधि ओर उसके प्रयोग | पानी के पोषक तत्व | OCTOBER 2019
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| tds in water |
TDS in water | टीडीएस क्या है? | पीने के पानी की सब जानकारी
सब जानते हैं, कि पानी हमारे शरीर के लिए कितना आवश्यक है। पानी के बिना
हम कुछ दिनों तक ही जीवित रह सकते हैं।
हमारे शरीर में
लगभग 70% से 90% पानी होता है। आप जानते ही हैं, की हर कोष में 70 से 90% पानी होता है हमारे शरीर के पाचन से लेकर अंग बनने में पानी सबसे महत्वपूर्ण
है।
इस पानी में बहुत
से रासायनिक ओर जीवित घटक होते
हैं। उनमें से हमारे देश के BIS ( ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड) के हिसाब, से कुछ तत्व कुछ प्रमाण में होना अति आवश्यक है।
प्रश्न : TDS क्या हे???
जैसे TDS (टीडीएस), pH (पीएच), Total Hardness (टोटल
हार्डनेस), Calcium (कैल्शियम), Magnesium ( मैग्निशियम), Chloride (क्लोराइड), Alkalinity (अलकालीनीटी), Sulfate (सल्फेट), Nitrate (नाइट्रेट), Fluoride (फ्लोराइड) एसे १४ तत्व का मापदंड नक्की किया हुआ है। टीडीएस मतलब कुल गलित क्षार इनका कुछ नक्की होना चाहिए। अगर बहुत ज्यादा है तो हानिकारक है और कम है
तो भी हानिकारक है।
हमारा देश तो नकल
से चलता है, तो जो पश्चिमी देश करते
हैं हम भी वैसा ही करते हैं। उन्होंने TDS का प्रमाण 500 से नीचे रखा है, मतलब के पानीमें पिघले हुए क्षार का कुल प्रमाण 500 mg/L से नीचे होना
चाहिए। मगर ऐसा नहीं लिखा कि 500 mg/L से कितना नीचे होना चाहिए?? अगर TDS “जीरो” हो तो
चलेगा? या नहीं? यह नहीं बताया। क्यों? नकल.. सीधी बात हे, नकल में अक्ल
नहीं होती।
इसी नकल की वजह
से यह R.O. वोटर की मशीन वाले अपनी मशीन बेचने लगे और
उन्होंने पानी में से सब महत्वपूर्ण क्षार, जो हमारे शरीर के विकास के लिए जरूरी है, वह भी निकाल दीए। अगर यह मशीन उन क्षारों का मापदंड सही रखें तो सबसे अच्छा है। यह आपके हाथों
में है, आप का मशीन वैसे सेट होना चाहिए।
प्रश्न : पानी मे कोनसे क्षार होते हे? वह कितने होने चाहिए?
पहला : Total Hardness (टोटल हार्डनेस)
मतलब सख्त पानी। यह
टोटल हार्डनेस बनता है कैल्शियम और मैग्नीशियम के क्षार से, यह क्षार पानी में जमीन
में से ही आते हैं। वह भूगर्भ में गर्मी से पानी में पिघलते हैं। अब कैल्शियम मतलब
चूने के पत्थरों में से रिसा हुवा पानी।
अब इसकी मात्रा पानी में 300 mg/L ( मिलीग्राम पर लीटर ) या तो 600 mg/L से कम होनी
चाहिए।
लेकिन R.O. मशीन इसको बहुत ही कम मतलब 50 mg/L से भी कम कर देता है, जिससे क्या होता है? कि पानी में
कैल्शियम कम हो जाता है। फिर हम शिकायत करते हैं कि यार मेरी हड्डियां दर्द कर रही
है। दांत गीर रहे हे। डॉक्टर कहते हैं कैल्शियम की कमी है कैल्शियम
की गोली खाओ।
अब वह जो कैल्शियम की गोली देता है। वह सिंथेटिक मतलब कृत्रिम रूप से बनाई जाती है। और जो
कुदरती पानी में पिघला कैल्शियम होता है वह भूगर्भ में लगभग जितनी गहराई उतनी जायदा गर्मी और दबाव से पिघला होता हे।
कैल्शियम का
मेल्टिंग प्वाइंट 800 डिग्री
सेंटीग्रेड होता है। तो यह कृत्रिम कैल्शियम हमारी बॉडी में कैसे पिघलेगा? क्योंकि हमारे शरीर का तापमान 37 डिग्री सेंटीग्रेड होता है। तो सोच लो जो पानी से मिलता
कैल्शियम है वह कितना जल्दी हमारे शरीर में कार्य करता होगा।
हमारे शरीर को
हररोज 1000 mg/L कैल्शियम की
आवश्यकता होती है। तो कुछ तो खुराक में से और कुछ पानी से मिल जाती हे। फिर हमें कैल्शियम की कमी क्यों होती है??
क्योंकि ऐसा भोजन ओर दूध तो हम लेते नहीं और पानी भी R.O. का पीते हे, तो कहां से मिलेगा कैल्शियम???
100 टीडीएस वाले R.O. पानी में तो 1 लीटर पानी पियो तो मुश्किल से 10 mg/L कैल्शियम मिलता
है। तो 1000 mg/L कैल्शियम के लिए आपको दिन का 100 लीटर पानी पीना पड़ेगा।
दूसरा : Chloride(क्लोराइड)
यह हमारे शरीर के
कोशो के अंदर-बाहर के प्रवाह
को संतुलित रखता है, एसिड-बेझ को संतुलित करता है, जिससे शरीर के प्रवाही की pH संतुलित रहती है और भी बहुत कार्य है।
इसका प्रमाण हमारे शरीर में 250 mg/L से 1000 mg/L होना चाहिए।
तीसरा : Fluoride (फ्लोराइड)
फ्लोराइड तो आप जानते ही हो, अगर कम हो तो
दांत हड्डियां खराब होते हैं और ज्यादा हो तो भी
दांत हड्डियों में फ्लोरोसिस रोग लग जाता है। जिससे हड्डियां कमजोर होकर टूट जाती
है। एक तो पानी में फ्लोराइड होता है ऊपर से टूथपेस्ट के द्वारा हम और लेते हैं
फिर तो दांत ओर हड्डी कमजोर होगी ही।
चौथा : Magnesium (मैग्निशियम)
मैग्नीशियम कम
मिलेगा तो ऑस्टियोपोरोसिस, थकान, शरीर की मांसपेशियों की कमजोरी, उच्च रक्तचाप, अस्थमा ,धड़कन बढ़ना जैसे रोग होते हैं।
ऐसे ही बाकी के सब क्षारों का कुछ न कुछ फायदा है, जो आप आरो के
पानी में से निकाल देते हो, फिर रोते हो की
गैस हुआ!! एसिडिटी हुई!! यही होगा। १०० % पक्की बात हे।
समझो पानी एक
उत्तम द्रावक है और उत्तम प्रक्रियक है। उसमें सभी चीजें आसानी से पिगलती है। तो जब आप उस पानी में से यह जरूरी तत्व
निकाल देते हो, फिर उसी को पीते हो, तो फिर होता यह है कि, वही पानी आपके
शरीर के अंगों में शोषित होकर उसमें से यही जरूरी तत्व सूखाने लगता है। क्योंकि पानी उन क्षारों से रासायनिक प्रतिक्रिया करता है और आपके
शरीर के कोशो, मांसपेशियों और अंगों में उन रासायनिक तत्वों की कमी हो जाती है। क्योंकि
पानी उन तत्व को सोख कर किडनी से
बाहर निकाल देता है। अगर पानी में आवश्यक क्षार होंगे तो फिर वह अंगों से यह तत्व शोखेगा नहीं बल्कि उसको देगा क्योंकि वह एक प्रक्रिया
है इसलिए यह कुदरती होता है।
फिर भी आप उन
मूर्ख विज्ञापनों में फसकर.. मूर्ख
बनाना चाहते हो तो आपकी मर्जी...
प्यूरीफाइड (R.O.Plant) प्लांट
वाले विज्ञापन देते हैं की हमारा पानी सुरक्षित है। पर कैसे? यह नहीं बता ते।
इनको अपना मशीन बेचना है। कुछ भी बोलेंगे, सारे हीरोइन, एक्टर, क्रिकेटर को पैसा देकर कुछ भी बुलवाएंगे तो क्या सही हो जाएगा?
अब तो एक मशीन
वाले ने तांबे के गुण वाला निकाला है अरे भाई! कचरे को किसी भी तरीके से दो, वह कचरा ही रहेगा। एक मशीन वाले ने तो इतना सस्ता सस्ता
करके मशीन बेचा की बुड्ढी अम्मा ने जो बहरी थी उसने सुन लीया। उसकी कीमत से उसका कान भी ठीक हो गया। सोचो...
कुछ तो अजीब नमूने हे, मिनरल वोटर बेचते हे। क्या करते हैं कि वे बेचारे पानी में से सब जरूरी तत्व
निकाल देते हैं, फिर वही तत्व वाले मिनरल
उसमें वापस डाल कर उसको बेच देते हे। वाह भाई कमाल है!!
कहते हैं हमारा मिनरल वोटर है।
कुछ तो कोई भी
सड़ा गला पानी बोतल में भर के, थेली में भर के, आर.ओ. के नाम से बेच देते हैं। कुछ आदर्श संगठन (स्टैंडर्ड कंपनी) तो यही पानी को ₹10
लीटर के हिसाब से बेचते हे और हम गधे की तरह वह पानी खरीद कर पीते हे। भाई घर से भर कर आओ, पानी क्या दिक्कत है, हां अगर मजबूरी
है तो फिर खरीदो यह बोतल क्या करें? मजबूरी है।
अब एक विश्लेषण समझो :
आरो मशीन आती है
करीबन 6000 से 20000 तक...
सालाना उसके ऊपर
आपका खर्च होता है 500 से लेकर 2000 तक हो सकता है....
यह मशीन की बिजली
की खपत भी अच्छी खासी होती है। क्योंकि इसको चलाने के लिए आपको घर की छत की टंकी
भी पूरी भरनी रखनी पड़ती है।
यह मशीन लगभग 1 लीटर पानी बनाने के लिए लगभग 6 लीटर पानी को बर्बाद कर देता है। यह आपके पानी
के टीडीएस के सेटिंग के ऊपर होता है फिर भी 100% पानी में से यह केवल 25% पानी को छानता है बाकी 75% पानी ऐसे ही वह जाता है।
R.O. मशीन खुद तो बिजली की खपत करता है, साथ में घर के छत की टंकी भरने के लिए भी बिजली की खपत
होती है।
तो इस तरह अंदाजन सालाना यह वॉटर प्यूरीफाइड आपको मशीन के साथ 9,000 से 10,000 तक पडी। अंदाज है... और लाइट बिल अलग। यह आपके प्योरिफाइड मशीन के ऊपर निर्भर
हे।
फिर मशीन दूसरे
साल सही चली तो ठीक है वरना इसके कुछ न कुछ खर्चे लगे रहते हैं।
इतना सब क्यों?
क्योंकि हमें पानी पीके अपना शरीर कमजोर करना
है!!!
इससे अच्छा है
अपने घर में आने वाले पानी का TDS चेक करवा के और R.O. पानी की बोतल
मंगवा कर मिक्स करके पानी पियो, शरीर तो अच्छा
रहेगा।
और हां अपने
मोहल्ले के काउंसिल से मिलो और जो पानी जल सेवा से आता है उसको चेक करवाओ। अगर वह
सही मापदंड का है तो वही पियो। आप खुद भी जल
सेवा की प्रयोगशाला में जाके उसे चेक करवा
सकते हो मगर हां उसके पैसे लगेगे।
प्रश्न : पानी के जैविक घटक बैक्टेरिया के बारेमे :
अब रहे पानी के जैविक
घटक बैक्टेरिया, शेवाल,
सुक्ष्मजीव आदि आदि....
इसके लिए हमारी
सरकार क्या नकल करती है, वह क्लोरिनेशन (Chlorination) करती है। उससे पानी में रहे यह सूक्ष्मजीव मर जाते हैं। तो इससे हमे नुकसान नहीं होगा???
इन बैक्टेरिया या
सूक्ष्म जीवों से हमें दस्त, उल्टी, कोलेरा जैसे रोग हो सकते हैं।
अमेरिकन सरकार
खुद तो युवी किरणों (Ultraviolet Ray) का इस्तेमाल करती है, क्योंकि क्लोरीन
एक प्रकार का धीमा जहर है, जो आपके शरीर को
नुकसान पहुंचाता है। कैसे??
यह क्लोरीन (Chlorine) जल
समिति के द्वारा आपके गांव या शहर के पानी की टंकी में किया जाता है। जो पानी आपके
घर तक पहुंचाता है, वहां तक का उस पानी में
क्लोरीन का प्रमाण 0.2 ppm (पीपीएम) मतलब 1 लीटर में 0.2 mg/L होना चाहिए, अगर उससे ज्यादा
हुआ तो?
तो आपको शरीर में
वायु मार्ग में जलन, घबराहट, सांस लेने में तकलीफ, गले में खराश, खांसी, सीने में जलन, आंखों में जलन, त्वचा में जलन, उल्टी, दस्त भी हो सकता
है।
U. S. Council of Environmental
Quality के अनुसार क्लोरिनेटेड पानी पीने वाले को, बिना क्लोरिनेटेड पानी पीने के मुकाबले 93% कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।
इसके अनुसार जो
लोग क्लोरिनेटेड पानी का उपयोग पीने, नहाने, खाने में, कपड़े धोने में
करते हैं, उनको हदय बंद होना, थकावट, सिर दर्द, आंख, चमड़ी, गले की खराश, यकृत खराबी, कमजोरी, गुर्दे की परेशानियां हो सकती है।
मगर वे कहते हैं
कि क्लोरीन तो खतरनाक है DBP’S उससे भी 100% ज्यादा खराब है। मतलब की कुछ ऐसे तत्व है जो पानी को
ज्यादा जहरीले बनाते हैं, उससे तो क्लोरीन
कम हानिकारक है।
खैर डरने की
जरूरत नहीं है, हमारे देश में कई हदय, यकृत, गुर्दे के
डॉक्टर है जो हमको ठीक ना कर सके तो
कुछ नहीं, पर कुछ ऐसी महंगी दवाइयां देकर, जल्दी हमें इस बीमारियों से सदा के लिए मुक्ति
दे सकते है।
प्रश्न : पानी मे क्लोरीन क्यो डालते हे ? क्लोरीन (Chlorine) क्या है?
क्लोरीन एक युद्ध की
सामग्री हे जिसे 1st world war और 2nd world war मे उपयोग किया गया
था।
भाई गूगल भरा
पड़ा है, पढे तो पता चले।
क्लोरीन एक
प्रकार का रासायनिक तत्व है।
क्लोरीन को जहर
भी कह सकते हैं। क्योंकि जो पानी के सूक्ष्म जीवों को मारता है, तो वह आपके शरीर के अंदर रहते, अच्छे काम के सूक्ष्म जीवों को भी मार सकता है।
और आपको भी।
वह पीले हरे रंग
का होता है, सामान्य तापमान पर वह
वायु रूप होता है, उसकी गंध ब्लीच जैसी खट्टी और तीव्र होती
है। अगर कुछ तत्वों से वह मिल जाए, तो स्फोटक भी हो सकता है।
इसका कोई
प्रतिरोधी मतलब एंटीडोट्स नहीं है, पर इसकी असर के
बहुत से लोग अच्छी तरह से ठीक हो चुके हैं, बाकी आप समझदार
हो ही।
प्रश्न : कैसे करें पानी को साफ जंतु मुक्त? कैसे घटाएं TDS और अन्य पानी में पाए जाने वाले तत्व???
पहला :
पानी को जंतु
मुक्त, मतलब माइक्रो ऑर्गेनिजम जो शरीर को रोगीस्ट करते हैं, उनको शुद्ध करने
का सबसे आसान और असरदार तरीका है, पानी को उबालकर
पियो। तो उबाला हुआ पानी में कोई भी सूक्ष्मजीव जो हमारे शरीर को हानि करें, वह बच नहीं सकते। १०० % पक्की बात हे।
इससे दूसरा फायदा
यह है की, क्लोरीन जैसे जहर से भी हम बच जाएंगे। क्योंकि पानी को उबालने से क्लोरीन
तत्व भी उठ जाएगा। क्योकि क्लोरीन वायु तत्व हे।
इससे सरकार का
क्लोरीन का खर्च भी बच जाएगा। मगर सरकार को ऐसी चीजों में कुछ करने की जरूरत
नहीं लगती।
दूसरा :
अगर टीडीएस
ज्यादा है तो आप R.O. की बोतल का पानी और जलसेवा का पानी मिलाकर उसका
टीडीएस योग्य मात्रा में कर सकते हो।
या तो आप अपने मोहल्ले के काउंसेलर को कह कर, अपने एरिया का
पानी का टीडीएस प्रमाणित मात्रा में करवा सकते हो। यह थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि सरकारी है,
या तो अच्छा है
आप एक टंकी रखो, जिसमें से जो अच्छे TDS वाला पानी हो वह खरीद कर उसे भर दो और वही पानी
पियो। इससे आपको थोड़ा खर्च तो होगा परंतु आप शरीर की बीमारियों के कारण चिकित्सक
के खर्च से बच जाएंगे।
या आप ऐसा मशीन लगवाए जिसमें TDS 500 से 1000 mg/L के बीच हो। परंतु
इसमें कौन से आवश्यक तत्व रहेंगे या नहीं वह पानी जांचे बिना पता नहीं चलेगा।
तीसरा :
प्रश्न : पानी में अलग-अलग तत्व की अधिकता हो तो क्या करें?
फ्लोराइड दूर
करने के लिए आप फिटकरी का उपयोग कर सकते हैं
आप एक लीटर पानी
में 0.5 ग्राम फिटकरी पीगाल कर डाल सकते हो, जिससे पानी में
से फ्लोराइड जैसी अशुद्धि पात्र के तले में बैठ जाएगी फिर आप उस पानी को ऊपर ऊपर से निकाल लो। तले के सफेद अवक्षेप को रहने दो, लेकिन फिटकरी का
प्रमाण ध्यान से उपयोग में ले, वरना पानी का
पीएच बढ़ शकता है जो हानिकारक है।
सादे फिल्टर जिसमें रेत-कंकर-जाली जैसी चीजों से बने फिल्टर से आप पानी के आयरन (Iron ) तत्वों को निकाल शकते हो।
अगर पानी थोड़ा
सकता है तो उबाल के ठीक हो जाएगा। ज्यादा सख्त होगा तो उबालने से कोई फायदा नहीं होगा।
यह सब उपायों को
जानने के लिए जलसेवा की प्रयोगशाला का संपर्क करें...
प्रश्न : कौन से तत्व का कीतना मापदंड है?
यह आप नीचे दी गई इमेज में जान
सकते हैं।
Value
as per IS १०५०० : २०१२ [२nd
Revision]
|
|||
क्रम
|
विवरण
|
महतम इससे
नीचे होना चाहिए
[Acceptable Limit ](A) |
अगर ऐसा
(A) कोई सोर्स न मिले तो
इससे नीचे का नाप भी चला शकते हे।
(B)
|
१
|
Colour - Hazen Units
|
५
|
१५
|
२
|
Odour
|
Agreeable
|
Agreeable
|
३
|
Turbidity - NTU
|
१
|
५
|
४
|
Dissolve Solids - mg/l
|
५००
|
२०००
|
५
|
Conductivity - µs/cm
|
…..
|
…..
|
६
|
pH
|
६.५ to ८.५
|
No
Relaxation
|
७
|
Total Hardness (as CaCO3)
mg/l
|
२००
|
६००
|
८
|
Calcium (as Ca +2 )
mg/l
|
७५
|
२००
|
९
|
Magnesium (as Mg +2 )
mg/l
|
३०
|
१००
|
१०
|
Chloride (as Cl - ) mg/l
|
२५०
|
१०००
|
११
|
Sulphate (as SO4 -2
) mg/l
|
२००
|
४००
|
१२
|
Nitrates (as NO3-
) mg/l
|
४५
|
No
Relaxation
|
१३
|
Fluoride (as F - )
mg/l
|
१.०
|
१.५
|
१४
|
Alkalinity (as CaCO3)
mg/l
|
२००
|
६००
|
१५
|
Iron (as Fe+2) mg/l
|
१.०
|
No
Relaxation
|
जैसे क्रम ७ मे Total Hardness का प्रमाण २०० मिलीग्राम/लीटर से नीचे होना चाहिए मगर अगर ऐसा कोई पानी का सोर्स
न मिले, तो ६०० मिलीग्राम/लीटर से नीचे हो ऐसा सोर्स
का पानी भी हम पी शकते हे।
कॉलम A (महतम इससे
नीचे होना चाहिए [Acceptable Limit ]) के प्रमाण से नीचे का पानी का सोर्स हम पी शकते हे, अगर ऐसा कोई सोर्स न मिले
तो, कॉलम B (अगर ऐसा (A) कोई सोर्स न मिले तो
इससे नीचे का नाप भी चला शकते हे।) मे दरसाए प्रमाण के नीचे वाला पानी भी हम पी शकते हे।
एक आसान उपाय :
आप योग्य TDS वाले (TDS की मात्रा 500mg/L से 1000mg/L होनी चाहिए ) पानी के एक घड़े को सुबह अच्छी तरह उबाले, फिर वह ठंडा हो जाए तो उसमें चार-पांच बार फिटकरी का एक टुकड़ा घुमा कर निकाल ले, फिर वह पानी को छान लें। छानते वक्त छन्नी में तुलसी एवं मरवा के कुछ पत्ते रख दे और एक मिट्टी के मटके
में भर के रख दे, यह पानी सबसे अच्छा पानी
आपके शरीर के लिए साबित होगा। १००% पक्की बात हे।
पानी का औषधीय उपयोग :
1 लीटर पानी को इतना उबालो कि वह 75 % बचे तो यह वायु शामक बन जाएगा...
1 लीटर पानी को इतना उबालो कि वह 50 % बचे तो वह पित्त शामक हो जाएगा...
1 लीटर पानी को इतना उबालो कि वह 25 % बचे तो वह कफ शामक हो जाएगा...
आप इसे जरूर आजमाएं।
पानी एक चमत्कारिक औषधि है :
थोड़े समय पहले
माशारू ईमोटो (Masaru Emoto) नामक जापनीस लेखक ने 2004 में पानी के ऊपर ऊपर प्रयोग किया था। अलग-अलग कमरे मे रखे पानी को उन्होंने अलग-अलग सुचनाए दी, अलग-अलग पानी को अलग-अलग भावनाये दी। जैसे एक पानी को उन्होंने प्रेम, एक को गुस्से, एक को डर की
भावनाएं दी थी।
उन पानी की बोतलों को फिर कुछ समय बाद उन्होंने माइक्रोस्कोप यंत्र
में जाच की। तो पाया कि जिस पानी को उन्होंने सकारात्मक भावनाएं दी थी, उसमें बहुत ही
अच्छे प्रकार के सुंदर क्रिस्टल बने हुए थे। ओर जिन पानी को उन्होंने नकारात्मक
उर्जा भावनाएं दी थी उसमें बहुत ही नुकीले एवं चित्र विचित्र प्रकार के क्रिस्टल
बने हुए थे।
इससे यह साबित
होता है कि, जैसे पेड़ जीवित है, वैसे पानी भी
जीवित है, और सोचो हमारे शरीर में तो 70 से 90 % पानी है तो हमारे शरीर पर भी
इस प्रकार की नकारात्मक भावनाएओ का कितना नुकसान
होता होगा। और सकारात्मक भावनाओं से हमारे शरीर के रोग भी ठीक हो सकते हैं। जो
इससे बड़ी सबीती और क्या है, हो सकती है की पानी एक
चमत्कारिक औषधि है।
प्रयोग एक :
आप करके देखो, आप जो भी पानी पियो उसमें कुछ सकारात्मक शब्द या वाक्य
बोलो। जैसे कोई मंत्र बोलो या वाक्य कि मैं “ संपूर्ण स्वस्थ हूं “ यह उसमें देख
कर 11, 21 या 51 बार बोलो फिर वह पानी पियो। देखो कितना फायदा
होता है। क्योंकि पानी जीवित है, वह उन शब्दों को
ग्रहण करके शरीर में बदलाव लाएगा ओर लाएगा ही। मैंने करके देखा ओर
बहुत फायदा हौवा मौजे बिलकुल १०० % पक्की बात हे।
प्रयोग दो :
आप अपने मन से
अपने शरीर को सकारात्मक सूचनाएं दो, क्योंकि आपका
शरीर का बड़ा हिस्सा पानी से बना है, तो वह यह चीज
ग्रहण कर लेगा और आपकी सोच बदल देगा। आपके शरीर के कई बीमारियां भी ठीक हो जाएगी। आप ऐसे प्रयोग लगातार 40 दिन तक जरूर करें, एक-दो दिन में कुछ नहीं होगा। मैंने करके देखा ओर बहुत फायदा हौवा मौजे बिलकुल १०० % पक्की बात हे।
इसी पानी की वजह
से “ पेड़ो “ में भावना का प्रभाव
पड़ता है, “ पशु – पक्षियों “ में भी पड़ता है। इसलिए
सकारात्मक भावना से पक्षी भी खिल उठते हे। पशुओं से भी अच्छे संगीत से अधिक दूध लिया गया है। और खेती
वाड़ी के पौधों को जल्दी उगाने में सफलता मिली हे। आप भी कोई ऐसा प्रयोग जरूर करें। खाली पढ़ने से
ही न मान ले।
मेरा प्रयोग:
मैंने एक बार एक
बोतल में आरो का 140 mg/L TDS वाला पानी लीया और दूसरे में 800 से 1000 mg/L TDS वाला पानी लिया।
फिर दोनों में से तीन चार दिन बाद पानी बदल देता था। दोनों में ही एक ही प्रकार का
पौधा उगाया था। लेकिन आरो के पानी वाले पौधे के विकास के सामने, सादे पानी वाला पौधा 50 % ज्यादा विकसित हो
गया।
हालांकि मनुष्य
और वृक्षों को पानी के अलग-अलग रासायनिक तत्वों की जरूरत होती है। लेकिन फिर भी
सादा पानी के पौधे का विकास से वह पुष्ट हुआ, कि कम TDS वाले पानी के मुकाबले, ज्यादा मतलब 1000 TDS वाला पानी के पोधे की लंबाई, पत्तों का रंग, आदि 50 % ज्यादा अच्छे थे। तो मेरे अनुभव के हिसाब से
हमारे पानी का TDS 500 से 1000 mg/L होना ही चाहिए।
तभी हमारे शरीर के जो आवश्यक तत्व है वह योग्य प्रमाण में हमारे शरीर को मिल
सकेंगे।
tds in water लेख आपको कैसा लगा जरूर बताना ताकि मुजे ऐसे लेख लिखने मे प्रोत्साहन मिले धन्यवाद
“ आज हम भूगर्भ मे से
जल खिच कर खत्म कर रहे हे और भूकंप ला रहे हे।
आज हम डेम बनाकर नदी
की प्राकृतिक दिशा बदल रहे हे और उसमे पलने वाले जीवो को मार रहे हे।
आज हम जंगलो को नष्ट
कर रहे हे और नदियो मे बाढ़ ला रहे हे।
आज हम शहेरो का विकाश
कर रहे हे और जीते जी मर रहे हे।
एक दिन एसा आएगा लोग
एक दूसरे का खून पीकर प्यास बुजाएंगे, लोग एक दूसरे का मांस खाकर भूख मिटाएगे,
क्योगी न रहेंगे जंगल, ना
आएगी बारिश, ना बचेंगे पशु।
फिर पूरी पृथवि पर राज
करना मेरे नासमज मनुष्य। “
आशा हे आपको यह लेख पसंद आया होगा, तो कृपा करके इसे शेर जरूर करे और दूसरों को भी जगाने मे सहायक बने। धन्यवाद।


आपके संदेश के लिए धन्यवाद । मे इस समय कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकता। मे आपको जल्दी जवाब देने की कोशिश करूंगा । ConversionConversion EmoticonEmoticon